भाजपा के राज में लूटी जा रही है भगवान की तिजोरी!: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार

(भोपाल) मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज भोपाल में प्रेस वार्ता कर सरकार के भ्रष्टाचार और मंदिर में हो रही कथित चोरी के मुद्दे को मजबूती से उठाया। उन्होंने मध्यप्रदेश के 13 जिलों से ₹18.82 करोड़ मूल्य के 7,168 टन गेहूं के लापता होने तथा आगर मालवा जिले के माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में चढ़ावे और आभूषणों के प्रबंधन से जुड़े गंभीर सवालों पर सरकार से जवाब माँगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी से पूरा देश अवगत है। भाजपा के शासन में अब भगवान की तिजोरी भी सुरक्षित नहीं है। पहले अयोध्या राम मंदिर से चंपत राय चंदा लेकर चंपत हो गए और अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में सोने-चांदी के आभूषणों और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिला कलेक्टर ने स्वयं स्वीकार किया है कि चढ़ावे और आभूषणों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा सरकार में मंदिरों की लूट हो रही है, यह देख के डर लगता है की अगला नंबर उज्जैन महाकाल मंदिर का तो नहीं? इससे पहले भी ओरछा के राजा राम सरकार मंदिर से नकद राशि और गहने गायब होने का मामला सामने आया था। 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी आप मौन क्यूँ है, आपकी सरकार की जांच आखिर किस दिशा में चल रही है? क्या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा, या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी? प्रदेश की जनता जवाब चाहती है।

MSP पर खरीदा गया 7,168 टन गेहूं लापता!
श्री सिंघार ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है, इसलिए जाँच नहीं करवा रही है। सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे गए गेहूं के भौतिक सत्यापन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। प्रदेश के 13 जिलों में खरीदे गए गेहूं में से 7,168 टन गेहूं गायब पाया गया है। लगभग ₹18.82 करोड़ मूल्य का गेहूं सरकारी रिकॉर्ड में तो दर्ज है, लेकिन वास्तविक स्टॉक से लापता है। ऐसे मामलों की जाँच न करावा कर सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किए और कहा मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, MSP पर खरीदा गया यह गेहूं आखिर गया कहाँ? जमीन खा गई या भ्रष्टाचारियों ने निगल लिया? गोविंद सिंह राजपूत जी, आखिर आपके विभाग में चल क्या रहा है? ₹18.82 करोड़ के इस घोटाले की भरपाई कौन करेगा? प्रदेश की जनता जवाब मांग रही है।

नर्मदा जल विवाद
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश डूबा… जमीन हमारी गई… गांव हमारे उजड़े… बदले में मध्यप्रदेश को ही ₹550 करोड़ देने होंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्षों से लंबित नर्मदा जल विवाद में एक विवादास्पद समझौता किया है।

सवाल यह है कि आखिर मध्यप्रदेश के अधिकारों से समझौता किसके हित में किया गया? जब प्रदेश ने स्वयं हजारों करोड़ रुपये का दावा किया था, तो फिर इतनी बड़ी राशि छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया? उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जमीन, किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की कीमत अब कौन देगा?

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की कि किस आधार पर मध्यप्रदेश के हक़ को छोड़ दिया गया? कृपया पूरे समझौते की शर्तें और तथ्य जनता के सामने सार्वजनिक करें।

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