मोहन यादव सरकार का ‘कृषक कल्याण वर्ष’ सिर्फ पीआर का छलावा, किसान लगातार बदहाल – कांग्रेस

(भोपाल) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल एवं पूर्व प्रवक्ता राहुल राज ने संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने को किसानों के साथ छलावा और केवल प्रचार आधारित अभियान बताया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान खरीदी संकट, फसल बीमा की अव्यवस्था, खाद की कमी, बाजार में गिरते दाम, भ्रष्टाचार और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहा है, जबकि सरकार वास्तविक समस्याओं के समाधान के बजाय केवल प्रचार में व्यस्त है।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष श्री मुकेश नायक, पूर्व प्रवक्ता श्री स्वदेश शर्मा, श्री अभिनव बरोलिया एवं श्री कुंदन पंजाबी उपस्थित रहे।

पूर्व विधायक श्री शैलेंद्र पटेल ने कहा कि
1. मूंग खरीदी में 25% कोटा कैप का छलावा
राज्य में 9 से 10.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुए बंपर उत्पादन (अनुमानित 13 से 20 लाख मीट्रिक टन) के बावजूद सरकार ने केवल 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी को मंजूरी दी है। प्रति हेक्टेयर खरीदी सीमा घटाकर मात्र 3 क्विंटल (1.25 क्विंटल प्रति एकड़) कर दी गई है, जबकि वास्तविक उत्पादकता 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है। परिणामस्वरूप किसानों को अपनी लगभग 75 प्रतिशत उपज ₹8,768 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाय ₹6,000 से ₹6,500 प्रति क्विंटल में बेचनी पड़ रही है, जिससे प्रति क्विंटल ₹2,200 से ₹2,700 तक का नुकसान हो रहा है।

2. गेहूं एवं धान एवं खरीदी में सौतेला व्यवहार
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किए गए ₹2,700 प्रति क्विंटल गेहूं खरीद के वादे से पीछे हटते हुए मात्र ₹40 प्रति क्विंटल बोनस दिया, जिससे कुल भुगतान ₹2,625 प्रति क्विंटल रहा। जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान में किसानों को ₹150 बोनस सहित ₹2,735 प्रति क्विंटल का भुगतान किया गया।

धान के मामले में भी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत ₹731 प्रति क्विंटल बोनस सहित ₹3,100 प्रति क्विंटल मूल्य तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीद सीमा निर्धारित की गई है, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को केवल ₹2,300 का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, जिससे उन्हें लगभग ₹800 प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान हो रहा है।

3.सोयाबीन संकट और भावांतर योजना का ढोंग
उत्पादन लागत दोगुनी होने के बावजूद सोयाबीन किसानों को पिछले दस वर्षों का सबसे कम मूल्य लगभग ₹3,500 प्रति क्विंटल मिला। सरकार ने ₹4,892 प्रति क्विंटल MSP घोषित की, लेकिन कुल उत्पादन का केवल 40 प्रतिशत खरीदने की सीमा तय कर दी।

4.भावांतर योजना में पंजीयन की अवधि जानबूझकर केवल 10 से 25 अक्टूबर तक सीमित रखी गई तथा सर्वर डाउन जैसी समस्याओं के कारण लाखों किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए।

5. खाद की किल्लत, मूल्य वृद्धि एवं किसानों का अपमान
डीएपी एवं यूरिया की भारी कमी के कारण श्योपुर सहित अनेक जिलों में किसानों को चक्काजाम करना पड़ा। बाजार में डीएपी की कालाबाजारी कर लगभग ₹1,800 प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है।

पूर्व प्रवक्ता श्री राहुल राज ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करना किसानों के साथ क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तरों, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की प्राथमिकी, केंद्रीय मंत्रालयों के दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर “कृषक कल्याण वर्ष–2026 आरोप-पत्र” तैयार किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने स्वयं विकेंद्रीकृत उपार्जन व्यवस्था को कमजोर किया। मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान एवं गेहूं खरीदी की विकेंद्रीकृत व्यवस्था से पीछे हटने का अनुरोध किया गया। इसके परिणामस्वरूप भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से केंद्रीकृत खरीदी बढ़ी, जहां कठोर गुणवत्ता मानकों के कारण बड़ी संख्या में किसानों की उपज अस्वीकृत हुई और किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी।

राहुल राज ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकारी उपार्जन व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभिन्न जिलों में परिवहन एवं भंडारण के दौरान लगभग 86 हजार क्विंटल गेहूं गायब होने के मामले सामने आए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि जबलपुर के मझौली सहित कई वेयरहाउसों में भौतिक सत्यापन के दौरान हजारों क्विंटल गेहूं कम पाया गया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का मामला है।

उन्होंने कहा कि धान उपार्जन में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में गोदामों में धान के स्थान पर भूसी एवं पुआल भरे जाने, फर्जी किसान पंजीयन तथा ई-उपार्जन पोर्टल पर काल्पनिक रकबा दर्ज कर करोड़ों रुपये की खरीदी दर्शाने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह किसानों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है।

राहुल राज ने कहा कि बुरहानपुर में हाल ही में आई आंधी और बारिश से लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की फसल नष्ट हो गई, जिससे किसानों को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद राज्य सरकार ने पर्याप्त राहत उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather Based Crop Insurance Scheme) तत्काल लागू की जाए तथा केला उत्पादकों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा भंडारण के लिए जारी टेंडरों में 134 में से 110 टेंडर अडानी समूह को दिए गए हैं, जिससे भंडारण व्यवस्था में एकाधिकार की स्थिति उत्पन्न हो रही है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

राहुल राज ने कहा कि वर्ष 2023-24 की प्राकृतिक आपदा के दौरान बड़ी संख्या में किसानों के फसल बीमा दावों का भुगतान नहीं किया गया। जांच में हजारों आवेदन पत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर मिलने तथा फर्जी बीमा पॉलिसियों के माध्यम से करोड़ों रुपये के क्लेम निकाले जाने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के उजागर होने के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में भी बदलाव किया गया।

उन्होंने कहा कि गृह विभाग द्वारा विधानसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार 1 जनवरी 2024 से फरवरी 2026 के बीच प्रदेश में 609 किसान आंदोलन हुए, जो किसानों की बढ़ती नाराजगी का प्रमाण हैं। वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़ी 835 आत्महत्याएं दर्ज हुईं, जिससे प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया।

कांग्रेस पार्टी की मुख्य मांगें:
1. मूंग की दमनकारी 25% सीमा को हटाकर 100% खरीदी वास्तविक उत्पादकता (15 क्विंटल/हेक्टेयर) के अनुरूप ₹8,768 की MSP पर की जाए।

2. भाजपा अपने संकल्प पत्र के वादे के मुताबिक गेहूं, धान एवं सोयाबीन पर अतिरिक्त बोनस मूल्य सुनिश्चित करे।

3. बुरहानपुर और अन्य जिलों के केला उत्पादकों के लिए मौसम आधारित फसल बीमा (WBCIS) लागू कर विशेष राहत पैकेज जारी हो।

4. एनपीके, पोटाश और एसएसपी खादों की बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस ली जाएं और जबरन टैगिंग व कालाबाजारी पर रोक लगे।

5. वर्ष 2016 के वादे के अनुसार पटवारी हल्का के स्थान पर ‘खेत’ को बीमा की इकाई माना जाए।

6. उपार्जन घोटालों, गायब गेहूं, और ₹122 करोड़ के बीमा घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।

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