रक्तदान सेवा है या फोटो सेशन………❓🩸
रक्तदान को नेताओं-अधिकारियों ने One Day Event बना दिया है……!
(शिविर का नाम :- स्वैच्छिक रक्तदान)
वास्तव में आजकल रक्तदान शिविरों का यह नया ट्रेंड चल पड़ा है जो कुछ लोगों के लिए On Day Event है।
सुबह-सुबह ब्लड बैंक में प्रशासनिक अधिकारियों का आगमन,फिर मंत्री विधायक का आगमन,उनके आते ही फूल माला एवं नारेबाजी के बाद :-
“माननीय जी लोगों का स्वागत ………..।”
फोटो खिंची,फेसबुक लाइव हुआ,अखबार में फोटो छपी और हो गया रक्तदान…….।
असली रक्तदाता जिसने रक्तदान किया,वो कोने में लाइन में खड़ा है,जिसे कोई पूछने वाला नहीं।फिर कुछ समय बाद ब्लड बैंक खाली,फिर वही मरीज के परिजन “एक यूनिट ब्लड दिला दो भैया” कहते हुए भटकते हैं।
साहब,
रक्तदान उत्सव नहीं,आदत है…………।
रक्तदान को इवेंट मत बनाइए,इसे संस्कार बनाइए।रक्तदान नेता के जन्मदिन पर नहीं,मरीज की जरूरत पर होना चाहिए।
वरना ये सेवा नहीं,सिर्फ एक दिन का दिखावा बनकर रह जाएगा।
रक्तदान करो,फोटो का दान नहीं….।
