सोयाबीन एवं मक्का फसलों का निरीक्षण –
( बैतूल )
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निरीक्षण के दौरान सोयाबीन फसल में जल भराव वाले खेतों में जड़ एवं तना सडऩ रोग एवं सामान्य खेतों में पर्णचित्ती धब्बों वाले रोगों का आक्रमण आरंभिक अवस्था में पाया गया। सोयाबीन में अत्यंत अल्प मात्रा में विषाणुजन्य मोजेक रोग भी देखा गया है। सोयाबीन फसल में तम्बाकू की इल्ली एवं हरी अर्धकुण्डलक इल्ली की भी जानकारी ली। मक्का फसल में फफूंदजन्य शीथ झुलसा रोग आरंभिक अवस्था में पाया गया। कृषि अधिकारियों ने सोयाबीन एवं मक्का के उक्त रोग आगामी दिनों में बढऩे की आशंका के दृष्टिगत इनका प्रबंधन प्राथमिकता के आधार पर किए जाने हेतु किसानों को आवश्यक सलाह दी है। उन्होंने बताया कि जलभराव खेतों में उत्तम जल निकास करें। सोयाबीन में मोजेकग्रस्त पौधों को उखाडक़र नष्ट करें। विभिन्न इल्लियों एवं फफूंदजन्य धब्बा रोग के प्रबंधन हेतु लेम्डासायहेलोथ्रिन $ थायोमिथाक्जाम 150 ग्राम/हे. या बीटासायफ्लूथ्रिन+इमीडाक्लोप्रिड 350 ग्राम/हे. के साथ टेब्यूकोनेजोल+सल्फर 1000 ग्राम/हे. या पायरोक्लोस्ट्रोबिन 500 ग्राम/हे. का छिडक़ाव अविलंब करें। इन दवाइयों के साथ किसी भी तरह के पोषक तत्वों का सममिश्रण न करें। मक्का के खेतों में शीथ ब्लाइट (इस रोग में पत्तियां एवं पर्णवृंत अचानक सूखने लगते हैं एवं सूखे हुए हिस्से में साबूदाना जैसी सफेद संरचनाएं दिखाई देती है) से ग्रस्त पौधों को निकालकर नष्ट करें एवं कार्बनडेजिम+मेंकोजेब 1000 ग्राम/हे. का छिडक़ाव करें। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करें। |
