छठ पूजा से पहले इस तरह करें घाट की तैयारी, पूरी होगी मुरादें
छठ पूजा से पहले इस तरह करें घाट की तैयारी, पूरी होगी मुरादें
मैंहर। 31 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ छठ पूजा आरंभ हो जाएगा। छठ पर्व प्रकृति से जुड़ने और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है। इसलिए सदियों से इस पर्व को नदी, तालाब और जल क्षेत्र के आस-पास मनाने की परंपरा रही है। प्राचीन काल में लोग छठ से एक महीना पहले ही नदी के तट पर आकर कल्पवास किया करते थे और यहीं कार्तिक मास की साधना करते हुए छठ पर्व मनाते थे। नदी के तट पर ही गेहूं को धोकर और सूखाकर प्रसाद तैयार करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है लेकिन अब भी बहुत से छठ व्रती रात भर छठ घाट पर रहकर रात्रि जागरण किया करते हैं। दरअसर छठ पूजा में घाट का सबसे अधिक महत्व है।
1/ 7 अर्घ्य देना कल्याणकारी है
गर गंगा नदी का घाट हो तो इसका महत्व और अधिक हो जाता है। अन्य नदियों और तालाबों के तट पर घाट बनाकर छठ मैय्या को अर्घ्य देना भी परम कल्याणकारी माना गया है। छठ पर्व के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति छठ मैय्या के लिए घाट निर्मित करता है माता उसे आरोग्य और सुख संपत्ति से निहाल कर देती हैं। इसलिए दीपावली के अगले दिन से ही लोग नदी, तालाब, पोखर के आस-पास घाट निर्माण करने में जुट जाते हैं। आमतौर पर छठ घाट का निर्माण पुरुष किया करते है
2/7घाट निर्माण में करें इन नियमों का पालन
जो लोग घाट का निर्माण करते हो उन्हें कुछ नियमों का भी पालन करना चाहिए। छठ सामाजिक एकता और भाईचारे का भी पर्व है इसलिए घाट निर्माण करते हुए मन में द्वेष भाव नहीं लाना चाहिए। अपनी डाली जितनी हो उससे अधिक लोगों के लिए घाट निर्मित करना चाहिए ताकि किसी को जरूरत हो तो आपके साथ घाट पर आकर पूजा कर सके।
3/7सभी मिलकर करें घाट की तैयारी
घाट बनाने को लेकर ना करें आपस में कहा सुनी। कई बार छठ घाट को बनाते समय लोग आपस में कहासुनी कर लेते हैं। ऐसे करने से छठ मैय्या प्रसन्न होने की बजाय नाराज हो जाती हैं। दरअसल छठ मैय्या के लिए सभी उनके बच्चे हैं इसलिए सभी को मिलकर छठ पूजा की और घाट की तैयारी करनी चाहिए।
4/7घाट बनाते समय ना करें ये भूल
जिस स्थान पर आप घाट बनाने जा रहे हैं वहां आस-पास के क्षेत्र की पहले साफ-सफाई कर लें। घास-फूस, गंदगी को साफ करके दूर फेंक दें जहां लोग आते-जाते ना हों। अगर दूर फेंकना संभव ना हो तो गड्ढा खोकर भूमि में दबा दें। बहुत से लोग घाट साफ करके गंदगी को जल में फेंक देते हैं। जल में गंदगी फेंकने से वरुण देवता और छठ मैय्या का अपमान होता है। जिस जल धारा में छठ पर्व मनाने जा रहे हैं यह उस जल धारा का भी अपमान होता है क्योंकि इसी जलधारा में छठ व्रती को खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना होता है। धार्मिक दृष्टि के अलावा यह भी सोचना चाहिए कि जल में गंदगी डालने से जो व्रती जल में खड़े होंगे उन्हें भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।
5/7इस तरह घाट को बनाएं छठ मैय्या का मंदिर
घाट को साफ करने के बाद पूरे घाट पर गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए। इससे घाट की अशुद्धता और नकारात्मकता दूर होती है। इसके बाद गोबर से घाट को लीपना चाहिए। घाट छठ मैय्या का मंदिर होता है। इसलिए छठ घाट को केले के पौधे, पताकों और लड़ियों से सजाना चाहिए। घाट सजाने के लिए उन्हीं केले के पौधों का प्रयोग करना चाहिए जिनसे फल कट चुके हों।
6/7इनका भी रखें ध्यान
घाट की सफाई के साथ ही साथ नदी और तालाब के अंदर की सफाई भी जरूरी है। जहां तक जल में जाकर व्रती पूजा करेंगे उस स्थान तक को साफ कर लेना चाहिए ताकि तल में कोई ऐसी चीज ना हो जो व्रती के पैरों को नुकसान पहुंचाए।
7/7घर के आंगन और छत पर करें छठ तो
आज कल समय और बदलती परिस्थितियों में बहुत से लोग नदी या तालाब पर जाने की बजाय घर के आंगन या छत पर भी छठ पूजा करने लगे हैं। अगर आंगन में गड्ढ़ा खोदकर या छत पर पानी इकट्ठा करके छठ मानने की योजना है तो छठ मैय्या से प्रार्थना करें कि, हे छठ मैय्या मेरे लिए घाट पर आना कठिन है इसलिए आपके लिए मैं अपने आंगन या छत पर घाट निर्माण कर रहा हूं आप मेरी श्रद्धा पूर्वक पूजा को यहीं स्वीकार करें। ऐसे कहने के बाद छठ के लिए जल भराव की व्यवस्था करें। इसके चारों तरफ दीप जलाएं और अच्छे से सजाएं। जल में गंगाजल जरूर मिला लेना चाहिए।
मैंहर में अलग अलग स्थानों पर छठ पूजा मनाई जाती है शारदा देवी धाम के लीलजी नदी के घाट पर, बाबा तालाब सतना रोड़, सोनवारी नदी के घाट पर छठ पूजा की रौनक देखी जा सकती है।
