बाबू लाल गोंटिया को अब घर के उजड़ने का नहीं है डर

कटनी  वनाधिकार उत्सव के जिलास्तरीय कार्यक्रम में आये कटनी विकासखण्ड के सरसवाही निवासी बाबू लाल गोंटिया की रोजी-रोटी और गुजरबसर वन क्षेत्रों में मेहनत मजदूरी और वनोपज से चल रही थी। उन्होने सरसवाही के जंगल में ही लगभग 15-20 साल से आरएफ कम्पार्टमेन्ट 106 में एक कच्चा घर भी बना लिया था, जिसमें वह अपनी पत्नि और बच्चों के साथ रह रहे हैं।

            बाबूलाल गोंटिया बताते हैं कि वनभूमि संरक्षण के कठोर नियम कायदों के फलस्वरुप उन्हें हमेंशा अपने घर के उजड़ने का डर बना रहता था। बाबू लाल और उनकी पत्नि रुकमणी बाई हरदम इसी चिन्ता में रहते थे, कि वनभूमि में रहने के लिये आसरा बना तो लिया है लेकिन कहीं कोई उन्हें इससे बेदखल करके उजाड़ नहीं दे। वनाधिकार अधिनियम के तहत अपनी काबिज वन भूमि का अधिकार पत्र पाकर बाबू लाल गोंटिया को अब अपने घर के उजड़ने का बिल्कुल डर नहीं है। खुशी और उत्साह में दो गुने बाबूलाल कहते हैं कि वनों में मेहनत मजदूरी कर चिन्ता मुक्त होकर अब शांति का जीवन व्यतीत करेंगे। उन्हें अपनी काबिज भूमि आरएफ कम्पार्टमेन्ट 106 में 0.009 हेक्टेयर भूमि का आधिपत्य मिल गया है।

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