गेंदा की जैविक खेती से मिली भरपूर आमदनी

कटनी  विकासखण्ड रीठी के कैमोरी निवासी उद्यानिकी कृषक कमल कांत कुशवाहा ने अपनी दो एकड़ जमीन में गेंदा पुष्प की जैविक पद्धति से पैदावार लेकर भरपूर आमदनी प्राप्त की है।

            किसान कमलकांत कुशवाहा बताते हैं कि अपनी दो एकड़ की जमीन में पारंपरिक तरीके से गेहूं, चना और धान की खेती कर परिवार का किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे। पिछले वर्ष उद्यानिकी विभाग की नर्सरी घुघरा के मार्गदर्शन में 10 डिसमिल जमीन में गुलाब की खेती का प्रयोग किया। जिससे लगभग 150 किलो का उत्पादन होने से 15 से 20 हजार रुपये की आय हुई।

            गुलाब की खेती से प्रेरणा लेकर इस वर्ष एक एकड़ क्षेत्र में जैविक पद्धति से गेदें की खेती की है। शासन के उद्यानिकी विभाग के माध्यम से जैविक पुष्प किट, वर्मीवेड, पाली लो टनल स्प्रेयर पम्प भी निःशुल्क प्रदाय किये गये हैं। वर्तमान में कमलकांत के गेंदें की खेती तैयार है और अच्छा उत्पादन भी हुआ है। प्रतिदिन 10-15 किलो गेंदे के फूल निकालकर मण्डी में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के मान से विक्रय कर रहे हैं। कमलकांत को आशा है कि दशहरा-दीपावली तक उनकी गेंदे की फसल 40 से 50 हजार रुपये की आमदनी देकर जायेगी। जैविक ढंग से खेती के गुण बताते हुये कमलकांत बताते हैं कि जैविक खेती और आधुनिक खेती की पद्धति पॉली लो टनल से नर्सरी पौधे तैयार करने से बाहरी कीड़े मकोड़े, पौध गलन बीमारी से बचाव होता है तथा स्वस्थ्य पौध नर्सरी तैयार हो जाती है। जिसमें पौधे अच्छी तरह एक समान उंचाई के तैयार होते हैं और उत्पादन एवं पुष्प, सब्जी की साईज गुणवत्ता एक समान होती है।

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