मानसिक स्वास्थ्य के लिये सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी –
( इन्दौर )
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर गत दिवस कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा वेबनार का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सा अधिकारी, मीडिया के प्रतिनिधियों में भाग लिया। मुख्य अतिथि के रुप में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जड़िया, विशेष अतिथि डॉ. संतोष वर्मा तथा समन्वयक के रुप में जिला विस्तार एवं माध्यम अधिकारी मनीषा पंडित ने भाग लिया। डॉ. प्रवीण जड़िया मुख्य अतिथि के रुप में बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सकारत्मक रहें, अच्छे कार्य करें, जीवन का संतुलन बनाए रखें, योग एवं ध्यान का नियमित अभ्यास करें, जींद पूरी लें, नशीले पदार्थों से दूर रहें, स्वयं का सक्रिय रखें।
मुख्य वक्ता के रुप में बोलते हुए डॉ. निधि जैन ने बताया कि नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार 10 प्रतिशत जनसंख्या कोई न कोई मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, जिसमें 0.8 प्रतिशत लोग गंभीर बीमारी से
जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है और अधिकांश जनसंख्या का हिस्सा नशीले पदार्थ का सेवन करता है। मानसिक बीमारियों का कारण अनुवांशिक एवं तनाव होता है। जिससे दिमाग में कुछ यूरोट्रांसमीटरर्स की गड़बड़ी से मानसिक बीमारियां होती हैं। डिप्रेशन, बाईपोलर डिस्आर्डर, ओ.सी.डी., एंजाइटी आदि मानसिक बीमारियां कोरोना महामारी के समय नींद के समस्या एवं एंजाइटी डिसऑर्डर के केस बढ़ गए हैं। मानसिक बीमारियों की वजह से हमेशा अपराध, आत्महत्या, घरेलू हिंसा एवं तलाक के केस भी बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हमारा भावनात्मक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने एवं कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। मानसिक विकारों के संबंध में जागरुकता की कमी भी भारत के समक्ष मौजूद एक बड़ी चुनौती है। किसी भी मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति को पागल ही माना जाता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधित मुद्दों को ठीक ढंग से संबोधित न किए जाने के कारण अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। मानसिक रोग महामारी न बने इसके लिए प्रयासरत रहें, समस्याओं पर बात करें, भावनाओं को प्रकट करें।
