ओपिनियन

डेटा की दलाली और ऋण की रेलमपेल : निजी बैंकों का नया लोकतंत्र : प्रियंका सौरभ

“नमस्ते महोदय/महोदया, क्या आप व्यक्तिगत ऋण लेना चाहेंगे?” कभी दोपहर की झपकी के बीच, कभी…

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रील की दुनिया में रियल ज़िंदगी का विघटन, दिखावे की दौड़ में थकती ज़िंदगी

सोशल मीडिया: नया नशा, टूटते रिश्ते और बढ़ता मानसिक तनाव (हिसार/हरियाणा) आज का समाज एक…

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पिता का पस्त मन और पुत्रों की पश्चिमी व्यस्तता, एक पिता की विदाई और समाज की परीक्षा

“लखनऊ के एक रिटायर्ड कर्नल ने अपने बेटों को एक मार्मिक पत्र लिखकर आत्महत्या कर…

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