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महाराजा संपादक: जब चौपाल बंद हो जाए और दरबार लगने लगे

जनता की बात नहीं सुनते संपादक, फिर किसके लिए हैं अखबार…? “जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता…

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उपराष्ट्रपति पद की दौड़ और सियासी समीकरण: क्या है बीजेपी की रणनीति…?

(नई दिल्ली) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में एक…

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डेटा की दलाली और ऋण की रेलमपेल : निजी बैंकों का नया लोकतंत्र : प्रियंका सौरभ

“नमस्ते महोदय/महोदया, क्या आप व्यक्तिगत ऋण लेना चाहेंगे?” कभी दोपहर की झपकी के बीच, कभी…

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रील की दुनिया में रियल ज़िंदगी का विघटन, दिखावे की दौड़ में थकती ज़िंदगी

सोशल मीडिया: नया नशा, टूटते रिश्ते और बढ़ता मानसिक तनाव (हिसार/हरियाणा) आज का समाज एक…

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दुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार : नीयत नेक, व्यवस्था बेकार

“इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं…

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पिता का पस्त मन और पुत्रों की पश्चिमी व्यस्तता, एक पिता की विदाई और समाज की परीक्षा

“लखनऊ के एक रिटायर्ड कर्नल ने अपने बेटों को एक मार्मिक पत्र लिखकर आत्महत्या कर…

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