केन्द्र और गुजरात के दबाव में मुख्यमंत्री मोहन यादव, सरदार सरोवर मुआवजे के छोड़े पौने आठ हजार करोड़

मध्यप्रदेश उल्टा 550 करोड़ गुजरात को देगा, यह कारनामा प्रदेश के किसानो से धोखा : अजय सिंह

(भोपाल) पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरदार सरोवर के लगभग सात हजार 770 करोड़ रूपये मुआवजे का मध्यप्रदेश का हक गुजरात के पक्ष में छोड़ दिया| उलटे मध्यप्रदेश अब 550 करोड़ रुपये गुजरात को देगा, जबकि सरदार सरोवर का सबसे बड़ा लाभार्थी गुजरात है| विगत दिवस दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई चार राज्यों की बैठक में मुख्यमत्री मोहन यादव ने समझौते पर हस्ताक्षर किये| दबाव में आकर उन्होंने मध्यप्रदेश का पक्ष सशक्त रूप से नहीं रखा और प्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए चुपचाप समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए| उनका यह कारनामा सरदार सरोवर के कारण डूब में आने वाले 192 गांवों के किसानों के साथ धोका है|

अजय सिंह ने कहा कि सरदार सरोवर बाँध की उंचाई 58 मीटर तक बढ़ाने के निर्णय से मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में से मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है| डेम में डूबी साढ़े सैंतीस हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का 55.50 प्रतिशत यानि 20 हजार हेक्टेयर से अधिक हिस्सा मध्यप्रदेश का है| उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सबसे ज्यादा खेती की जमीन डूबी| सबसे ज्यादा गाँव उजड़े| सबसे ज्यादा जंगल डूबे| इसलिए मध्यप्रदेश ने पुनर्वास खर्च, राजस्व और वन भूमि और सरकारी इमारतों के नुकसान की भरपाई के रूप में गुजरात से सात हजार 669 करोड़ रूपये की मांग की थी| लेकिन अब मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए इस मुआवजे को गुजरात के हित में छोड़ दिया, उल्टे अब गुजरात को 550 करोड़ रूपये देने के समझौते पर हस्ताक्षर कर आये|

श्री सिंह ने कहा कि मोहन यादव एक कंप्रोमाइज्ड मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना हित पहले देखा और मध्यप्रदेश का बाद में| उन्होंने केंद्र और गुजरात सरकार के राजनीतिक दबाव के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं| उनके इस कृत्य से मध्यप्रदेश को अपने जायज हक से हाथ धोना पड़ा है| अजय सिंह ने कहा कि विस्थापन की सबसे बड़ी त्रासदी हमारे मध्यप्रदेश के तमाम गरीब और आदिवासी किसानों ने झेली है| सबसे उपजाऊ खेती की जमीन और अनमोल जंगल पानी में समा गये| यह फैसला सीधे तौर पर उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसा है| साथ ही मध्यप्रदेश के खजाने पर 550 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ लाद दिया गया है| उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री जनता को जवाब दें कि उन्होंने किस दबाव में आकर इस समझौते को स्वीकार किया है|

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