मध्य प्रदेश के अधिकारों से समझौता क्यों? अमित शाह के दबाव में मोहन यादव सरकार ने सरदार सरोवर मामले में प्रदेश के हित गिरवी रख दिए – जीतू पटवारी
(भोपाल) मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि आज की प्रेस वार्ता का मुख्य विषय मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से जुड़ा गंभीर विवाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह के दबाव में मध्य प्रदेश सरकार ने घुटने टेक दिए हैं और प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों तथा मध्य प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की है।
श्री पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पूरे देश में तीन प्रमुख कारणों से चर्चा में है—व्यापक भ्रष्टाचार, प्रदेश पर लगातार बढ़ता कर्ज और सरकार का विजनहीन नेतृत्व।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार “अली बाबा 40 चोर” की सरकार बन चुकी है और भ्रष्टाचार हर विभाग तक फैल चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि घोटाले पर पिछले 20 दिनों से बनी चुप्पी मीडिया में प्रकाशित तथ्यों की मौन स्वीकृति जैसी प्रतीत होती है।
श्री पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार पर वर्तमान में ₹5,61,786 करोड़ का भारी कर्ज है तथा हाल ही में ₹600 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज भी लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के टैक्स और कर्ज के पैसे का उपयोग राजनीतिक प्रचार, विज्ञापनों, होर्डिंग्स और बड़े आयोजनों पर किया जा रहा है। जब कांग्रेस सरकार से श्वेत पत्र, मोदी की गारंटी, रोजगार और आर्थिक स्थिति पर सवाल पूछती है तो जवाब देने के बजाय सरकार विपक्ष पर हमले करती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को आगे ले जाने का कोई स्पष्ट विजन दिखाई नहीं देता और पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के विकास का कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है।
श्री पटवारी ने वर्ष 2019 की उस घटना की याद दिलाई जब आरोपों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाने के लिए सरदार सरोवर बांध को उसकी पूरी क्षमता तक भर दिया गया था,जिसके कारण मध्य प्रदेश के सैकड़ों गांव डूब गए और प्रदेश को भारी मानवीय तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है। इसलिए नर्मदा मैया पर पहला अधिकार मध्य प्रदेश की जनता का है। इसके बावजूद सरदार सरोवर परियोजना का सबसे अधिक नुकसान भी मध्य प्रदेश ने ही उठाया।
उन्होंने बताया कि संभावित 230 प्रभावित गांवों में से 178 गांव मध्य प्रदेश में, जबकि केवल 19 गांव गुजरात में हैं। बांध के कारण मध्य प्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए, जबकि गुजरात में यह संख्या लगभग 4,000 परिवार है। मध्य प्रदेश ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि, आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय क्षति का बोझ उठाया है।
श्री पटवारी ने कहा कि इन्हीं नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तत्कालीन राज्य सरकार ने ₹76,69 करोड़ का दावा प्रस्तुत किया था। लेकिन आरोप है कि डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बड़े दावे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट मध्य प्रदेश सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से गुजरात को लगभग ₹550 करोड़ देने पर सहमति जता दी। सरकार दावा कर रही है कि उसने ₹1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर ₹231 करोड़ में निपटा दिया और ₹1,268 करोड़ की बचत की है। श्री पटवारी ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और किन अधिकारियों की भूमिका रही, इसका पूरा सच प्रदेश की जनता के सामने आना चाहिए।
उन्होंने सरकार से पूछा कि सरदार सरोवर बांध के लगभग ₹7,500 करोड़ के दावे को छोड़कर ₹1,250 से ₹1,500 करोड़ के बीच समझौता कैसे किया गया? इतने बड़े निर्णय पर विधानसभा, विपक्ष या प्रदेश की जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? कांग्रेस इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग करती है।
श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है, सरकारी संपत्तियां बेची जा रही हैं और प्रदेश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों और जनसंपर्क विभाग के माध्यम से मीडिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है ताकि सरकार की विफलताएं जनता तक न पहुंचें। उन्होंने इसे लोकतंत्र और स्वतंत्र मीडिया के लिए गंभीर खतरा बताया।
शिक्षा के मुद्दे पर श्री पटवारी ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार देशभर में बंद हुए लगभग 5,000 स्कूलों में से 2,500 स्कूल अकेले मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं। उन्होंने पेपर लीक, आरजीपीवी भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्था का उल्लेख करते हुए मांग की कि देश में KG से PG तक शिक्षा पूरी तरह निशुल्क की जाए।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार का विषय है। प्रदेश में इसे लागू करने की चर्चा केवल जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग पौने दो करोड़ आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों पर इसके संभावित प्रभाव पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि आज मध्य प्रदेश महिलाओं पर अत्याचार, आदिवासियों पर अत्याचार, बलात्कार, ड्रग्स माफिया, शराब माफिया और विभिन्न प्रकार के अपराध एवं भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार बदनाम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस सरकार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगी। इसी क्रम में 15 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस “अयोध्या से महाकाल तक” कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को भी जनता के सामने लाएगी।
अंत में जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की आस्था, संस्कृति और जीवन रेखा है। कांग्रेस किसी भी कीमत पर प्रदेश के अधिकारों, किसानों के हितों और नर्मदा के न्यायसंगत हिस्से से समझौता नहीं होने देगी तथा इस पूरे मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने तक संघर्ष जारी रखेगी।
