एक नजर आपकी , हमारी कलम पर – अमित सिह परिहार

ये क्या हो रहा है .. ?

(इंदौर) एक कॉमेडी सीरियल आता था उसमें एक पात्र ये डॉयलॉग हमेशा बोलता रहता था ,, ये क्या हो रहा है ,,

यही हालत हमारे जुम्मेदारो के हो गए है ,सभी झुंझलाते हुए कह रहे है ,, ये क्या हो रहा है ,, और बेचारी आम जनता तड़प तड़प के कह रही है ,, ये क्या हो रहा है ,,

सबका अपना अपना दर्द छुपा है ये क्या हो रहा है ,, में । मुखिया जी भी ध्यान नही दे पा रहे है वे घबराकर दाएं बाए देखने लगते है कोई ,, वेटिंग ,, में तो नही है । बड़ा बुरा हाल हो चला है सभी का क्या करे क्या न करे समझ मे नही आ रहा है।

नए नए प्रयोग कर रहे है परंतु सारे प्रयोग माथे आ रहे है।
अब देखे किराना दुकानें अच्छी  भली सुबह से 11 बजे तक रोज खुलती थी ,कोई भीड़ नही लगती थी ,प्रयोग का कीड़ा कुलबुलाया फरमान जारी हुआ कि अब दुकाने सोमवार व गुरुवार को सुबह 6 बजे से दोपहर 4 बजे तक खुलेगी आज ही इस प्रयोग की पोल खुल गई दुकानों पर लंबी लंबी लाइन भीड़भाड़ जमा, अब सभी कह रहे है ,,ये क्या हो रहा है ,, ।

जिले के प्रशासनिक अफसरों के व्यवहार से क्षुब्ध हो कर दो मेडिकल अफसरों ने अपने इस्तीफे दे दिए है , दोनों पक्ष अपने आप को निर्दोष व मेहनतकश साबित करने में जुटे है, स्वास्थ कर्मी संगठित हो कर विरोध पर उतारू हो गए है । कामधाम छोड़ इस महा विकट घड़ी में समय की बर्बादी कर रहे है । कौंन किस पर भारी पड़ता है समय जाने ,परंतु इनकी ये हरकते मरीजो पर भारी पड़ रही है , मरीज बिचारे कह रहे है ,, ये क्या हो रहा है ,, ।

दोनों पक्षो के राजनेता धुलेंडी खेल रहे है, कोई कह रहा इंजेक्शन बेच रहे हो, दूसरा जवाब दे रहा तुम ख्वाब देख रहे हो ,सभी अपनी अपनी हांडी ले कर शहर भर दौड़ रहे कि आंच कहा मिलेगी ताकि अपनी खिचड़ी पका सके। इनकी दौड़ भाग देख बेचारी जनता बोल रही है इस बुरे समय मे ये ,, क्या हो रहा है ,,

इंसान तो इंसान अब जानवर भी इस महामारी में भारतीय दंड विधान के दायरे में आ गए है , बेचारे एक निर्दोष स्वान को अपने मालिक की हरकतों का खामियाजा भुगतना पड़ा, बेवजह उसे अपनी गिरफ्तारी देना पड़ी ये दुनिया का अनूठा मामला है इसे गिनीज बुक में शामिल होना चाहिए , ताकि दुनिया के लोग भी कह उठे ,, ये क्या हो रहा है ,,

भविष्य की परिस्थितियां क्या होगी कोई नही बता सकता, सभी बीरबल की खिचड़ी पकाने में लगे है ऐसा करो वैसा हो जाएगा के चक्कर मे सब पड़े है। नए नए प्रयोग कर जनता के दर्द को बढ़ा रहे है ।

इस बात से सभी जुम्मेदार बेखबर है कि गरीब जनता रोज कमाने खाने वाले भीतर ही भीतर सुलग रही है, ज्वालामुखी कभी भी फुट सकता है ,फिर मत कहना ,, ये क्या हो रहा है ,,

अशोकनगर जिले का एक मार्मिक दारुण दृश्य वाला वीडियो देखने को मिला, एक महिला थानेदार वर्दी  में अपने दो मासूम बच्चों को खुद से लिपटा कर जमीन पर पड़ी अपने पटवारी पति की निष्प्राण देह के पास बैठ विलाप कर रही है जिसने भी ये वीडियो  देखा उसकी आंख भर आईं ।  जिले के जुम्मेदार मीठी नींद सो रहे थे उन्हें क्या फर्क पड़ता है कोई छोटा मोटा उनका कर्मचारी हमेशा के लिए सो जाय क्या हमारे संवेदनशील मामाजी उस जिले के जुम्मेदार अफसरों से सख्ती से पूछेंगे की ,, ये क्या हो रहा है ,,

साथियों इस महामारी में हम ही एक दूसरे का सहारा है तन मन धन से एक दूसरे की मदद करे
भगवान जरूर हमारी मदद करेगा ।

कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करे,मास्क के बगैर बाहर न निकले , जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले, अपना व अपने परिवार के स्वास्थ का ख्याल  रखें ,स्वस्थ समाज स्वस्थ भारत

जय हिंद जय भारत

अमित सिह परिहार
पत्रकार इन्दौर

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