छोड़ी मजदूरी, बनाया समूह, नर्सरी तैयार कर अब बन रहीं आत्मनिर्भर

आजीविका मिशन के दो महिला स्व- सहायता समूहों ने मनरेगा के सहयोग से बरगवां नं. 1 बड़वारा व कटनी के खिरवा गांव में तैयार की नर्सरी

लहलहा रहे एक लाख 20 हजार पौधे

कटनी  जिले के बड़वारा विकासखंड के गांव बरगवां नं. 1 और कटनी के खिरवा ग्राम की कुछ महिलाएं एक साल पहले तक परिवार के भरण पोषण के लिए मेहनत मजदूरी पर आश्रित थीं। महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की मन में ठानी और आजीविका मिशन के साथ जुड़कर स्व सहायता समूह बनाया। समूह के माध्यम से महिलाओं ने पौधों की नर्सरी बनाकर उनका विक्रय करने का मन बनाया। आज दोनों समूह की नर्सरियों में एक लाख 20 हजार फलदार, छायादार व अन्य पौधे बाजार में विक्रय को तैयार हैं। महिलाएं अब समूहों के जरिए नर्सरी का संचालन कर आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैं।

      बड़वारा विकासखंड के बरगवां नं. 1 में मजदूरी करने वाली महिलाओं ने दुर्गा स्व सहायता समूह और कटनी के खिरवा गांव की महिलाओं ने शिवशक्ति स्व सहायता समूह बनाया। वर्ष 2020 में आजीविका मिशन के द्वारा समूहों के माध्यम से सरकारी भूमि पर नर्सरी संचालन करने की योजना के तहत अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर मार्गदर्शन दिया।

      जिला पंचायत सीइओ जगदीश चंद्र गोमे के मार्गदर्शन में दोनों ही समूहों को 1 जून 2020 को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। दोनों समूहों की महिलाओं को उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित नर्सरी में ही दो-दो एकड़ भूमि में नर्सरी संचालित करने की जिम्मेदारी क्रियांवयन एजेंसी के रूप में सौंपी गई।

महिलाओं ने कहा अब होंगे आत्मनिर्भर

      बरगवां नं. 1 और खिरवा की महिला स्वसहायता समूहों की सदस्य अब मजदूरी करने नही जाती हैं। वे अपनी नर्सरी को सजाने में जुटी हैं। महिलाओं ने कहा कि उन्हें खुशी होती है कि वे मजदूरी करने की जगह अपना खुद का कार्य कर रही हैं। अब जल्द ही वे पूरी तरह से आत्मनिर्भर होंगी और अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह से कर सकेंगी।

तीन साल का किया गया अनुबंध

      महिला समूहों की नर्सरियों के संचालन को लेकर तीन वर्ष का अनुबंध किया गया है। साथ ही वर्षवार कार्ययोजना तैयार कर काम कराया जाना है। प्रत्येक नर्सरी में 50 लाख 34 हजार रूपये की लागत से व्यवस्था और गार्ड रूम, पानी आदि की सुविधा भी दी जानी है। उसी के अंतर्गत महिलाओं ने एक साल में दोनों ही स्थानों पर आम, अमरूद, कटहल, आंवला, जामुन, नीबू, महुआ, करंज आदि के एक लाख 20 हजार पौधे तैयार किए हैं। महिलाओं का उत्साह बढ़ाने समय-समय पर आजीविका मिशन के साथ उद्यानिकी, मनरेगा, आरईएस सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी नर्सरियों का विजिट कर मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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