महिलाओं ने समझा मार्केट का रुख, राखियां खरीदी, कमा रही मुनाफा
बाकल की खेरमाई स्व सहायता समूह की महिलाओं ने रक्षाबंधन पर लगाया स्टाल
खुद भी सीखेंगी राखी बनाना, अगले सीजन में करेंगी थोक व्यापार
कटनी – मध्य प्रदेश डे राज्य आजीविका मिशन जिले की ग्रामीण महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने और उनके सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशन में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में सतत रूप से योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं। जिसके तहत ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वसहायता समूहों का गठन कर उन्हें क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा हैं। जिसका लाभ लेकर समूह की महिलाएं विभिन्न तरह की आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर सशक्त और आत्मनिर्भर हो रही हैं।
काबिलेगौर है कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में बढ़ चढ़कर आगे आ रही हैं। चाहे वो सेवा का क्षेत्र हो या मार्केटिंग का। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों की बराबरी से काम करने में जुटी है।
इन्ही प्रयासों से बहोरीबंद तहसील के ग्राम बाकल में स्व सहायता समूह की महिलाएं भी आगे आकार प्रदेश शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर हो रही हैं। ऐसा ही एक उदाहरण जिले की बहोरीबंद तहसील अंतर्गत बाकल में देखने को मिल रहा है। जहां पर स्व सहायता समूह की महिलाओं ने रक्षाबंधन को देखते हुए मार्केट का रुख समझा और ऋण लेकर राखी खरीदकर स्टॉल का शुभारंभ किया। राखियों की बिक्री में मिल रहा अच्छा खासा फायदा, अब उन्हें रास आ रहा है और स्टाल के अलावा भी वे आसपास के छोटे-छोटे गांव में लगने वाले बाजारों में भी अपनी राखियां बेचकर कमाई कर रही हैं। बाकल की खेरमाई स्व सहायता समूह की महिलाएं आजीविका मिशन के माध्यम से जुड़ी हुई हैं।
आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने रक्षाबंधन से पहले राखियों का व्यापार करने के लिए मन बनाया और इसके लिए उन्होंने मार्केटिंग को समझते सबसे पहले 90 हजार रुपये का ऋण योजना के माध्यम से लिया। ऋण में मिली राशि से महिलाओं ने कटनी के बाजार से थोक में राखियों की खरीदी की और बाकल में समूह की ओर से एक स्टॉल लगाया है। जिसमें भी बारी-बारी से स्वयं काम कर रही हैं। लगभग 20 दिनों से उनका स्टॉल लगा हुआ है, जिसमें उनकी लाई राखियों को खरीदने वाले लगातार पहुंच रहे हैं और अच्छा खासा मुनाफा समूह की महिलाएं कमा रही हैं।
पति भी कर रहे सहयोग
महिलाओं द्वारा राखी की बिक्री के लिए लगाए स्टॉल में मुनाफा देख कर उनके पति भी उनके इस व्यापार में मदद करने में जुट गए हैं। महिलाओं के अनुसार बाकल और आसपास के क्षेत्रों में गांव में छोटी-छोटी बाजार लगती हैं, जहां पर वह अपने पतियों को राखियां लेकर भेज रही हैं। इसके माध्यम से भी उनकी बिक्री में काफी इजाफा हुआ है।
खुद सीखेंगे, फिर करेंगे थोक का व्यापार
इस बार महिलाओं ने बाजार से बनी बनाई राखियां खरीदी हैं लेकिन मुनाफा को देखते हुए अब उन्होंने खुद से ही राखिया तैयार करने का मन बनाया है। स्वसहायता समूह की सदस्य माया देवी, ज्योति काछी, रेखा पटेल, ज्योति पटेल, ममता पटेल, कामना पटेल, पप्पी सहित अन्य जनों का कहना है कि वे कच्चा माल लगाकर राखियां निर्माण करने की तकनीक चीखेगी उसके बाद अगले सीजन में वे स्टाल लगाकर खुद की बनाई राशियां तो बेचैन की ही उनकी कोशिश रहेगी कि छोटे छोटे व्यापारियों को भी थोक के भाव में वे राखियां उपलब्ध करा सके।
