कलेक्टर ने विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों की एक मुश्त राशि जारी करने पर जि़ला योजना अधिकारी को दिया नोटिस

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निर्माण एजेंसी के चयन में नहीं किया गया नियमों का पालन

50 हजार रूपए से कम लागत के कार्य की ही एक मुश्त राशि जारी करने का है प्रावधान

(कटनी)- विधायक निधि से अनुशंसित और स्वीकृत कार्यों की नियम विरुद्ध तरीके से एक मुश्त पूरी राशि जारी करने पर कलेक्टर श्री अवि प्रसाद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला योजना अधिकारी से तीन दिवस के भीतर समक्ष में उपस्थित होकर इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

      कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा जिला योजना अधिकारी को जारी कारण बताओ नोटिस में उल्लेखित किया गया है कि जिले की सभी चार विधानसभा क्षेत्रों के विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों की पूरी राशि एक मुश्त जारी की गई है। साथ ही इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई है। जबकि 50 हजार रूपए से अधिक लागत वाले कार्यों की एक मुश्त राशि जारी नहीं किए जाने का नियम है। लेकिन इन नियमों का उल्लंघन कर बिना वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए ,आपके द्वारा एक मुश्त राशि जारी की गई है, जो नियम विरुद्ध है। एक मुश्त जारी की गई राशि की सूचना भी आपके द्वारा वरिष्ठ अधिकारी को नहीं प्रदान की गई। साथ ही आपके द्वारा विधायक निधि से अनुशंसित कई कार्यों में स्वीकृत की गई पूरी राशि एक मुश्त जारी करने हेतु नस्ती प्रस्तुत करना तथा कई कार्यों में स्वीकृत की गई राशि से कम राशि जारी करने हेतु नस्ती प्रस्तुत करना स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है।

    इसके अलावा आपके द्वारा नियमों का पालन नहीं करते हुए मानक प्रक्रिया से हटकर नस्तियों में प्रक्रियात्मक त्रुटि की गई है।जो मप्र सिविल सेवा आचरण नियमों और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना -2013 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत है।जो उदासीनता ,लापरवाही, स्वेच्छारिता व प्रक्रियात्मक अनियमितता का द्योतक है।

             इसी प्रकार जिला योजना अधिकारी द्वारा विधायक निधि से अनुशंसित कार्यों की स्वीकृति में निर्माण एजेंसियों के निर्धारण में संबंधित विधायकों के परामर्श से नियमानुसार निर्माण एजेंसी तय करने का प्रावधान होने के बाद भी आपके द्वारा शासकीय वरिष्ठ बुनियादी माध्यमिक शाला बिलहरी में विधायक निधि से टीन शेड प्रोफाइल सीट निर्माण  के लिए शिक्षा विभाग के बजाय प्राचार्य हाई सेकेंडरी स्कूल बिलहरी को निर्माण एजेंसी बनाया गया है। जबकि नियमानुसार शिक्षा विभाग को निर्माण एजेंसी बनाया जाना चाहिए था। इसे नस्ती में अवगत नहीं कराया गया।

    इन सभी विषयों से संबंधित सकारण जवाब तीन दिवस के भीतर कलेक्टर श्री प्रसाद के समक्ष में उपस्थित होकर देने के निर्देश दिये गये हैं।

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