शिव के नाम पर नशा अपराध ….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से
‼️एक विचारणीय चिंतन‼️
(मैहर) वर्तमान समय का एक बहुत बड़ा दुर्भाग्य यह है कि बहुत सारे लोगों द्वारा भगवान शिव के नाम पर भाँग, गांजा जैसे अनेक प्रकार का नशा किया जाता है और भोले बाबा का प्रसाद कहकर दूसरों को भी कराया जाता है। हाँ भगवान शिव नशा अवश्य करते थे लेकिन केवल और केवल राम नाम का ही नशा करते थे। महादेव तो भोलेनाथ हैं इसलिए भांग के पत्ते, जिन्हें पशु तक भी नहीं खाते और धतूरे का वह फल, जिसे कोई पक्षी तक चोंच नहीं मारते उनको अर्पित करने वाले का भी कल्याण कर देते हैं।
रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि भगवान भोलेनाथ के प्रसाद के नाम से प्रचलित इस नशा की कुप्रथा का सभी शिव भक्तों द्वारा पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। नशा करने वाले का कभी भी कल्याण संभव ही नहीं, अब वह भले ही भोले बाबा अथवा देवी माँ के प्रसाद के नाम से ही क्यों न किया जाए। यदि तनिक भी कल्याण की चिंता हो तो शिव के नाम पर नशा नहीं अपितु शिव के नाम का नशा करो। अंत में सार केवल इतना कि भक्ति का नशा करो, नशे की भक्ति कदापि नहीं।
रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि जिस तरह शिव जी ने सागर मंथन में निकली हुई सारी अच्छी चीज़ें दूसरों में बांट दीं और सारा जहर स्वयं पी गए और विनाश से सृष्टि को उभार लिया इसी तरह यदि सब लोग अपने मन का जहर अपने भीतर ही रखें उन्हें दूसरों को नहीं परोसें तो जीवन सुखद हो सकता है। अपनी इंद्रियों को अच्छाई में लगाएं तो जीवन अच्छा हो सकता है और सृष्टि जल्दी विनाश से बच सकती है। यदि जीने की कला हाथ लग जाए तो जीवन बांस का टुकड़ा नहीं आनंद देने वाली बांसुरी बन जाता है।
