महिलाओं को दिया गया श्री विधि से धान उत्पादन एवं मिट्टी के प्रकार का तकनीकी प्रशिक्षण

(कटनी) – राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान कटनी द्वारा विकासखंड विजयराघवगढ़ के ग्राम पंचायत कलहरा के मोहन टोला में 33 स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए कृषि उद्यमी का 13 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण संस्था के प्रबंधक पवन कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में एवं प्रशिक्षण समन्वयक सुनील रजक के सहयोग से जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा दिया जा रहा है।

            इसी क्रम में सोमवार को धान उत्पादन के लिए श्री विधि जिसे मेडागास्कर विधि भी कहते हैं, का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अंतर्गत कम बीज, कम पानी तथा कम लागत पर सामान्य से डेढ़ गुना अधिक उपज प्राप्त होती है। प्रति हेक्टेयर 5 किलोग्राम बीज की नर्सरी डालकर 9 से 11 दिन के पौधे नर्सरी से उखाड़ कर खेत में तैयार कतार से कतार 9 इंच एवं पौधे से पौधे को 9 इंच की दूरी पर एक-एक पौधे को एक स्थान में रोपाई कर देना चाहिए। इन पौधों की जड़ों में मिट्टी एवं बीज लगा होना चाहिए। इसके अलावा गोमूत्र या ट्राइकोडर्मा विरदी को 8 से 10 ग्राम प्रति किलो बीज में बीज उपचार कर तथा उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि के लिए जैव उर्वरक अजेक्टोबैक्टर तथा फास्फेटिका से उपचार करने के बारे में भी जानकारी दी गई।

            प्रशिक्षण के दौरान खेत की मिट्टी परीक्षण परिणाम के अनुसार तत्वों के कमी की पूर्ति हेतु जैविक खादों की पूर्ति तथा नींदा नियंत्रण हेतु कोनोवींडर से निंदाई-गुड़ाई करने की जानकारी दी गई। मिट्टी के प्रकारों के अंतर्गत दोमट मिट्टी, काली मिट्टी, लाल मिट्टी, लेटराइट मिट्टी, पर्वतीय मिट्टी, शुष्क एवं मरुस्थलीय मिट्टी, लवणीय मिट्टी या क्षारीय मिट्टी तथा जंगली मिट्टी मिट्टी की जानकारी दी गई। इन मिट्टियों में होने वाली फसलों के विषय में भी बताया गया।

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