ग्राम उधरनिया में मनरेगा से निर्मित अमृत सरोवर बना सिंचाई, मत्स्य पालन और सिंघाड़ा खेती का केंद्र

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(खरगोन)  जिला पंचायत बड़वाह की ग्राम पंचायत बावी के ग्राम उधरनिया में मनरेगा योजना से निर्मित अमृत सरोवर सिंचाई, मत्स्य पालन और सिंघाड़ा खेती का केंद्र बन गया है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति लाई है।

मनरेगा योजनांतर्गत कुल लागत रुपए 22.92 लाख से तैयार इस अमृत सरोवर के निर्माण में 110 से 120 जाबकार्डधारी परिवारों को रोजगार प्रदाय कर 5056 मानव दिवस सृजित किये गये थे। इस अमृत सरोवर की जल भंडारण क्षमता 15,000 घनमीटर है, जिससे प्रतिवर्ष 40 से 45 एकड़ कृषि भूमि सिंचित होगी। क्षेत्र के लगभग 40 किसान परिवार को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के अलावा इस अमृत सरोवर में मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन की भी संभावनाएं है। सरोवर में मदीना स्वयं सहायता समूह द्वारा मत्स्य पालन एवं सिंघाड़ा उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समूह को वार्षिक आय लगभग रूपए 4.5 लाख होगी। अमृत सरोवर के निर्माण के बाद से भू-जल स्तर में वृद्धि दर्ज हुई है और पशुओं के लिए भी पेयजल सुविधा मिल रही है।

अमृत सरोवर जैसा वृहद कार्य बिना समुदाय की सक्रिय सहभागिता के किया जाना संभव नहीं था। ग्रामीणों द्वारा कार्य के चयन से लेकर क्रियान्वयन तक प्रत्येक चरण में ग्राम पंचायत को सहयोग प्रदाय किया गया। ग्राम पंचायत ने अमृत सरोवर निर्माण के लिए ग्राम सभा आयोजित कर सर्वसम्मती से कार्य हेतु उपयंत्री के मार्गदर्शन में उपयुक्त स्थल का चयन किया। पंचायत में मुनादी करवाकर मजदूरों को अकुशल श्रम करने हेतु कार्य पर आने के लिये आमंत्रित किया गया। जनभागीदारी से ग्रामीण पारिस्थितिकी को बदलने में यह अमृत सरोवर एक सर्वोत्तम उदाहरण सिद्ध हुआ है।

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