कुछ खासों के लिए पत्रकारिता, बाकी सब ‘ऑनलाइन’ देखिए!

(सतना) जिले के नव नियुक्त पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह ने पदभार संभालते ही यह साबित कर दिया कि “पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं।” शुरुआत भी ऐसी कि मानो पत्रकारिता में भी आरक्षण लागू कर दिया गया हो — एक खास वर्ग को बुलाइए, बाकी सबको प्रेस नोट थमा दीजिए!

जानकारी मिली है कि एसपी साहब ने कुछ ‘चुने हुए’ पत्रकारों को बुलाकर खूब आत्मीयता दिखाई। उन्हें चाय, कॉफी और शायद कुछ खास टिप्स भी दिए गए होंगे! जबकि बाकी पत्रकारों के लिए बस एक ठंडा प्रेस नोट — जिसे पढ़कर वो खुद ही अंदाज़ा लगाएँ कि प्रशासन चल क्या रहा है। कुछ पत्रकारों को तो सीधे फोन कर बुलाया गया, बाकियों को लगा शायद व्हाट्सऐप पर कोई संदेश आएगा… पर नहीं, वे अब भी इनबॉक्स पर ‘टाइपिंग…’ का इंतज़ार कर रहे हैं।

लोकतंत्र में संवाद सबके लिए होता है, पर सतना में संवाद ‘वीआईपी पत्रकारों’ के लिए सुरक्षित है। बाकी पत्रकार ‘आम जनता’ की तरह प्रेस नोट पढ़ें और अनुमान लगाएँ – “शायद हमें भूल गए हों… या हम इतने आम हैं कि बुलाने की ज़रूरत ही नहीं समझी गई!”

खैर, प्रशासन की यह नई पहल भी कमाल है – पत्रकारिता में चयन, संवाद में पक्षपात और लोकतंत्र में ‘विशेषाधिकार’। बाकी पत्रकार अब यह सोच रहे हैं – अगली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस का लिंक भी शायद पासवर्ड से सुरक्षित होगा!

✍️ उमेश गौतम
संपादक समग्र प्रदेश
          मैहर

उमेश गौतम
संपादक समग्र प्रदेश

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