7 साल पुराने ‘पगडंडी विवाद’ का लोक अदालत में हुआ शांतिपूर्ण समाधान
लोक अदालत का उद्देश्य हुआ चरितार्थ विवादित रास्ता बनेगा सदभाव की मिसाल
(अनुपपुर) गांव की एक पगडंडी को लेकर दो परिवारों के बीच पिछले 7 साल से विवाद चल रहा था — रास्ते के विवाद को लेकर पक्ष- विपक्ष के बीच मनमुटाव रहने के साथ ही “किस ने कंकड़ डाले, किसने मिट्टी हटाई, और किसके दरवाज़े के सामने रास्ता मुड़ा?” जैसे प्रश्न पर FIR से लेकर कोर्ट की तिथियों तक सब कुछ हो चुका था।पर इस साल गणेश उत्सव के दौरान, जब बप्पा पूरे गांव में विराजे थे, तभी कोतमा तहसील के हरद ग्राम का यह मामला लोक अदालत में पहुँचा जहां कोतमा न्यायालय के न्यायाधीश अमनदीप सिंह छाबड़ा ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर सिर्फ कानून नहीं, बल्कि गांव के रिश्तों की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि आपसी विवाद कोर्ट से नहीं समझदारी से निपटाए तभी समाज बचेगा।दोनों पक्ष न केवल राज़ी हुए, बल्कि उसी पगडंडी पर बप्पा की झांकी एक साथ ले जाने की बात भी पक्की हो गई।गांव वालों ने कहा–“जिस रास्ते पर झगड़ा था, अब वहीं पर साथ-साथ ‘बप्पा मोरया’ के नारे गूंजेंगे। ” इस मामले के सुलझने के साथ ही लोक अदालत के आपसी समझौते का उद्देश्य भी फलीभूत हुआ।
