विजयराघवगढ़ सिविल अस्पताल में सिर चढ़कर बोल रही महिला चिकित्सक की मनमानी
गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल की राह पकड़वा कर, झाड़ लेती हैं पल्ला, सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी
प्रसूतिका को जबरन बता दिया हाई रिस्क, कर दिया रेफर, बीएमओ ने दिखाई संवेदनशीलता
(विजयराघवगढ़) एक ओर जहां सरकार गर्भवती महिलाओं के पोषण से लेकर स्वास्थ्य सुविधा आदि पर जोर दे रही है तो वहीं विजयराघवगढ़ सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक की मनमानी और हिटलरशाही सरकार की मंशा पर पानी फेरने का ही काम कर रही है। वैसे तो कहने के लिए सिविल अस्पताल विजयराघवगढ़ सर्व सुविधा युक्त है लेकिन यहां महिला चिकित्सक डॉक्टर धनेश्वरी सिंह की मनमानी के कारण गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल की राह पकड़ना पड़ती है।
काफी समय से अपने अड़ियल रवैए के लिए जगजाहिर हो चुकीं डॉक्टर श्रीमती सिंह की अब पौ बारह इसलिए भी हो गई है क्योंकि इस समय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की कमान उनके पति डॉक्टर राज सिंह के हाथों है। ऐसे सैयां भए कोतवाल तो फिर डर काहे का की कहावत भला चरितार्थ तो होना ही है। उक्त महिला चिकित्सक द्वारा मनमर्जी से काम करना उनकी फितरत में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि अगर किसी गर्भवती महिला ने प्रसव से पूर्व किसी अन्य महिला चिकित्सक से जांच, परामर्श आदि से लिया और फिर अगर प्रसव के लिए वह महिला सिविल अस्पताल विजयराघवगढ़ गई तो महिला चिकित्सक श्रीमती सिंह का माथा फाइल देखते ही कुछ इस तरह ठनक जाता है कि सिविल अस्पताल में प्रसव होना टेढ़ी खीर हो जाता है। कोई न कोई रिस्क बता कर महिला को कटनी रवाना कर दिया जाता है। यह कोई आरोप प्रत्यारोप का क्रम नहीं बल्कि हकीकत की बानगी है।
हाल ही में जीता जागता उदाहरण सामने आया जब विजयराघवगढ़ के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी महिला यशस्वी तिवारी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा उन्हें सिविल अस्पताल विजयराघवगढ़ में भर्ती कराया गया। यहां फाइल देखने के बाद जांच की खाना पूर्ति महिला चिकित्सक द्वारा करने के बाद परिजनों को यह जानकारी दी गई कि बच्चे की ग्रोथ कम है, बच्चे के गले में नाल भी फंसी है, मामला हाई रिस्क का है, नार्मल या सीजर से यहां प्रसव कराना संभव ही नहीं। जिला अस्पताल में सीजर से ही प्रसव हो सकेगा। घबराए परिजनों ने आनन फानन में प्रसूतिका को कटनी ले जाने की तैयारी आखिर कर ही ली।
इस पूरे मामले में एक बात जो खास थी वह थी बीएमओ डॉक्टर विनोद कुमार की संवेदनशीलता। डॉक्टर विनोद स्वयं प्रसूतिका महिला के साथ एम्बुलेंस में बैठकर कटनी जिला अस्पताल रवाना हुए और वहां महिला को भर्ती कराया। जब यहां चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि न मामला हाई रिस्क का है न ही बच्चे की ग्रोथ कम थी। जिला अस्पताल में सामान्य प्रसव के बाद महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
इस पूरे मामले ने डॉक्टर श्रीमती धनेश्वरी सिंह की भर्राशाही की कलई खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसी महिला चिकित्सकों की मानसिकता और कार्यशैली पर अंकुश न लगने के कारण चिकित्सा व्यवस्था पर पलीता ही लगकर रह जाता है।
✍️ अजय त्रिपाठी
RPKP INDIA NEWS
विजयराघवगढ़

