मोबाइल पर गेम नहीं खेलें, मैदान में जाकर कबड्डी और खो-खो खेले बच्चें

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धरगांव की शासकीय स्कूलों में आयोजित हुए विधिक साक्षरता शिविर

(खरगोन) आजकल के बच्चे खेल-कूद से दूर होते जा रहे हैं। वे मैदान में खेलने के बजाय घंटों बैठकर मोबाइल पर गेम खेलकर अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बिगाड़ रहे हैं। यह बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं वरिष्ठ खंड न्यायाधीश सुश्री प्रीति जैन ने शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय, शासकीय कन्या हाईस्कूल एवं शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय धरगांव में मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर अलग-अलग आयोजित विधिक साक्षरता शिविरों में कही। इस दौरान न्यायाधीश सुश्री जैन ने कहा कि जो बच्चे मोबाइल पर गेम खेलते हैं, वे डिप्रेशन का शिकार भी हो जाते हैं और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है। इसलिए बच्चों को हमारे परंपरागत खेल खेलने चाहिए। कबड्डी, दौड़, खो-खो, कुश्ती जैसे खेल शारीरिक दक्षता बढ़ाते हैं, इससे शरीर स्वस्थ होता है और मन भी प्रसन्न होता है। खेलकूद से व्यक्ति मानसिक रूप से भी स्वस्थ हो जाता है, इसलिए बच्चों को खेलकूद के लिए मैदान में जाना चाहिए।

न्यायाधीश सुश्री जैन ने कहा कि इस उम्र में बच्चे मैदान में खेल सकते हैं, जब उम्र बढ़ जाती है तब व्यक्ति खेल नहीं सकता। इसलिए अभी खेल लें, बड़ी उम्र होने पर मोबाइल चलाया जा सकता है। मोबाइल का उपयोग भी सावधानीपूर्वक करना चाहिए। किसी व्यक्ति को गलत संदेश या गलत फोटो नहीं भेजें क्योंकि यह साइबर अपराध कहलाता है। पॉक्सो एक्ट के बारे में जानकारी देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी बालिका का पीछा करना, उसे घूरना, उस पर फब्तियां कसना, उसको अश्लील संदेश देना अपराध की श्रेणी में आता है। बालिकाएं ऐसी घटना होने पर डरें नहीं बल्कि उसकी शिकायत करें। शिकायत करने वाली बालिका का नाम-पता गोपनीय रखा जाता है।

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