धनतेरस के दिन दिव्यांग ने उठाई इंसाफ की आवाज — बोले, “सरकार हमें पेंशन न दे तो इच्छा मृत्यु ही दे दे
(मऊगंज /मध्यप्रदेश) धनतेरस के पावन दिन जब पूरा देश दीपों की रोशनी में खुशियाँ मना रहा था, वहीं मऊगंज जिले के ग्राम सीतापुर निवासी दिव्यांग दीपक गुप्ता ने अपनी तकलीफों और उपेक्षा की आवाज बुलंद की। दीपक गुप्ता, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, ने सरकार से सवाल पूछा कि आखिर उनके जीवन का मूल्य कब समझा जाएगा। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि “अगर हमें 5000 पेंशन नहीं मिल सकती, तो सरकार हमें इच्छा मृत्यु ही दे दे।

मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना जैसी योजनाओं में भी उन्हें बैंकों द्वारा बार-बार टाल दिया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद का न्यूज़ स्टूडियो शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन बैंक ने बिना उचित कारण लोन अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा — “हम दिव्यांग लोग न तो भीख मांगना चाहते हैं और न किसी पर बोझ बनना चाहते हैं। बस सरकार हमें इतना सहारा दे दे कि हम सम्मान से जी सकें।” दीपक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला से आग्रह किया कि वे दिव्यांगों की वास्तविक स्थिति को समझें और योजनाओं को केवल कागजों में न चलाएँ।

दीपक गुप्ता ने यह भी कहा कि प्रदेश भर में लाखो दिव्यांग आज भी सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। ₹600 की पेंशन में कोई व्यक्ति अपना पूरा महीना नहीं चला सकता। उन्होंने कहा, “सरकार को यह सोचना होगा कि दिव्यांगों को दया नहीं, अवसर चाहिए। हमें कियोस्क, आधार सेंटर या स्वरोजगार की सुविधा दी जाए, ताकि हम अपने पैरों पर खड़े हो सकें।” उन्होंने समाज से भी अपील की कि दिव्यांगों की आवाज़ को अनसुना न किया जाए। हर व्यक्ति इस अभियान का हिस्सा बने ताकि सरकार तक यह संदेश पहुँचे कि अब दिव्यांग भी अपनी चुप्पी तोड़ चुके हैं। दीपक ने अपने आवेदन में लिखा है कि वे संघर्ष करेंगे जब तक कि शासन-प्रशासन उनकी बात नहीं सुन लेता।
ग्राम सीतापुर, तहसील मऊगंज के रहने वाले दीपक गुप्ता ने अंत में कहा — “हम जीना चाहते हैं, लेकिन सम्मान से। अगर सरकार हमें जीने का हक नहीं दे सकती, तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे — ताकि यह अपमान भरा जीवन खत्म हो और शायद सरकार को तब हमारी कीमत समझ में आए।”
