कैमोर विज्ञान महाविद्यालय में विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का प्रशिक्षण

(कटनी) – शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को स्वरोजगार के माध्‍यम से आत्मनिर्भर बनाने हेतु कैमोर विज्ञान महाविद्यालय में जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमपी स्वर्णकार के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक आफरीन अली के सहयोग से जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा दिया गया।

          प्रशिक्षण में जैविक खेती की आवश्यकता के अंतर्गत मिट्टी की उर्वरता और संरचना का संरक्षण, जल और वायु प्रदूषण से बचाव, खेती की लागत कम करना, उपभोक्ताओं को शुद्ध सुरक्षित और पोषक अन्न उपलब्ध कराना, सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की जानकारी दी गई। साथ ही देसी गाय के गोबर तथा गोमूत्र का जैविक खेती में उपयोग की जानकारी दी गई। बताया गया कि देसी गाय के 1 ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं जबकि विदेशी गाय के 1 ग्राम गोबर में 78 लाख सूक्ष्म जीवाणु पाये जाते हैं। देसी गाय के गोमूत्र में 33 प्रकार के तत्व पाए जाते हैं। गोमूत्र का उपयोग बीज उपचार, कीटनाशक, शीघ्र खाद एवं पौध पोषण में उपयोग की जानकारी दी गई।

          बताया गया कि जैविक खाद में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं। ग्राम में उपलब्ध संसाधनों से जैविक खाद एवं कीटनाशक बनाकर फसलों में उपयोग किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान कम लागत तकनीकी जीरो बजट फार्मिंग से खेती कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की भी तकनीकी जानकारी दी गई। कृषि के अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली के अंतर्गत फसल उत्पादन सब्जी उत्पादन, जैविक खेती, मछली पालन, मुर्गी पालन, रेशम उत्पादन, मशरूम उत्पादन,  फल एवं फूलों की खेती, औषधीय पौधों की खेती तथा वानिकी एवं उद्यानिकी की खेती करके स्वरोजगार स्थापित करने की जानकारी दी गई।

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