एपीएस विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन: सतत विकास और जिम्मेदार व्यवसाय पर एनेट एफ. विश्वास का प्रेरक संबोधन

(रीवा) अदाणी फाउंडेशन की सीएसआर क्लस्टर हेड श्रीमती एनेट एफ. विश्वास ने अपने प्रभावशाली विचारों और दूरदर्शी नेतृत्व से कैमोर सहित पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। उन्हें अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “प्रबंधन और वाणिज्य में नवोन्मेषी अनुसंधान और सतत विकास” के उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर उन्हें “सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट, ईएसजी और जिम्मेदार व्यवसाय” विषय पर मुख्य भाषण देने का सम्मान भी प्राप्त हुआ।

अपने संबोधन में श्रीमती एनेट विश्वास ने कहा कि आज के समय में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है। विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थानों को ऐसे संवेदनशील, जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व का निर्माण करना चाहिए जो समाज और राष्ट्र को सही दिशा दे सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब विश्वविद्यालय, उद्योग और समाज एक-दूसरे से जुड़ते हैं, तभी वास्तविक और स्थायी परिवर्तन संभव होता है।

उन्होंने सम्मेलन को एक ऐसा सार्थक मंच बताया जहाँ शोध को नई दिशा मिलती है, विद्यार्थियों को अपने उद्देश्य की पहचान होती है और विचारों को व्यवहारिक क्रियान्वयन का मार्ग प्राप्त होता है। छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा, “आइए हम ऐसा भविष्य गढ़ें जहाँ व्यवसाय मानवता के लिए हो, विकास प्रकृति के साथ संतुलन में हो और प्रगति मजबूत मूल्यों पर आधारित हो।” उनका यह संदेश विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा।

श्रीमती विश्वास ने सम्मेलन के विषयों के चयन के लिए अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अदाणी फाउंडेशन और प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे उनके लिए गर्व का क्षण बताया कि उन्हें मध्य प्रदेश के माननीय उप-मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल जी के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला, जिन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

इस गरिमामय अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति सहित देश-विदेश से पधारे अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, शोधकर्ता और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह सम्मेलन न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सतत विकास और जिम्मेदार व्यवसाय की दिशा में एक मजबूत संदेश देने वाला सिद्ध हुआ।

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