कटनी वन मंडल में 20 फरवरी से शुरू होगी गिद्धों की गणना

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(कटनी) मध्य प्रदेश में गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को मजबूती देने के लिए शुक्रवार (20 फरवरी) से तीन दिवसीय शीतकालीन गिद्ध गणना शुरू हो रही है। कटनी वन मंडल में यह अभियान वनमंडलाधिकारी श्री गर्वित गंगवार के निर्देशन में चलेगा। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी कटनी सहित पूरे प्रदेश में 20 से 22 फरवरी तक गिद्धों की गिनती की जाएगी।

वनमंडलाधिकारी ने बताया कि गणना वन परिक्षेत्र कटनी, रीठी एवं विजयराघवगढ़ के अंतर्गत वन विभाग की टीमों द्वारा की जाएगी। तीनों दिन सुबह 6:30 बजे से गिद्धों की निगरानी और गणना शुरू होगी। इच्छुक स्वयंसेवक उपवनमंडलाधिकारी (पूर्व कटनी) के मोबाइल नंबर 9424792726 पर संपर्क कर अभियान में भाग ले सकते हैं।

यह गणना प्रदेशव्यापी शीतकालीन अभियान का हिस्सा है, जो वर्ष 2025-26 के लिए आयोजित की जा रही है। मध्य प्रदेश में पहली बार Epicollect5 जैसे मोबाइल ऐप का उपयोग कर हाईटेक तरीके से डेटा संग्रह किया जा रहा है, जिससे गणना अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध होगी। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों जैसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया आदि में सैकड़ों कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सात प्रमुख गिद्ध प्रजातियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

मध्य प्रदेश: गिद्धों का मजबूत गढ़

मध्य प्रदेश को “गिद्ध राजधानी” कहा जाता है, जहां पिछले एक दशक में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2016 में राज्य में मात्र 6,999-7,000 गिद्ध दर्ज हुए थे, जो 2025 की गणना में बढ़कर 12,981 हो गए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार अब यह संख्या 14,000 के आसपास पहुंच चुकी है। देश में सबसे अधिक गिद्ध आबादी यहीं है, और संरक्षण प्रयासों से संख्या दोगुनी हुई है। कटनी जिले में भी सुधार दिख रहा है—2025 की ग्रीष्मकालीन गणना में 401 गिद्ध दर्ज हुए, जबकि फरवरी 2025 में 382 थे।

राष्ट्रीय संदर्भ में महत्व

भारत में गिद्धों की संख्या 1990 के दशक में डिक्लोफेनाक जैसी दवाओं से 95-99% घटी थी। 2006 में प्रतिबंध और Vulture Action Plan से रिकवरी शुरू हुई। मध्य प्रदेश के प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल हैं। यह गणना न केवल स्थानीय जैव-विविधता की निगरानी करेगी, बल्कि राष्ट्रीय डेटा में योगदान देगी। गिद्ध “प्राकृतिक सफाईकर्मी” हैं, जो बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं।

वन विभाग ने सभी से अपील की है कि वे गिद्धों के संरक्षण में सहयोग करें और जहरीली दवाओं के इस्तेमाल से बचें। यह अभियान गिद्धों की रक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

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