सिम कार्ड मेरा, मोबाइल मेरा — फिर इनकमिंग कॉल पर ताला क्यों… रवींद्र सिंह( मंजू सर )मैहर की कलम से
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता बन चुका है। सिम कार्ड हमारे नाम पर रजिस्टर्ड होता है, मोबाइल हमारा निजी उपकरण होता है, फिर भी जब बैलेंस समाप्त हो जाता है तो न केवल आउटगोइंग कॉल बंद कर दी जाती है बल्कि कई बार इनकमिंग कॉल भी रोक दी जाती है। यह स्थिति समझ से परे और आम उपभोक्ता के साथ अन्याय जैसी प्रतीत होती है।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि आउटगोइंग कॉल बंद होना कुछ हद तक समझ में आता है, क्योंकि वह एक सेवा है जिसके लिए कंपनी शुल्क लेती है। लेकिन इनकमिंग कॉल तो सामने वाला व्यक्ति करता है और उसका शुल्क भी वही चुकाता है। ऐसे में इनकमिंग सेवा बंद कर देना उपभोक्ता पर अतिरिक्त दबाव डालने जैसा है।रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत है मान लीजिए, एक दैनिक मजदूरी करने वाला एक व्यक्ति है — उसका नाम गोविंद है। वह मुंबई शहर में काम करता है और उसका परिवार हाउसिंग बोर्ड मैहर में रहता है। महीने के अंत में जब उसका मोबाइल बैलेंस खत्म हो जाता है, तो वह कुछ दिनों तक रिचार्ज नहीं कर पाता। इसी बीच उसके कालोनी हाउसिंग बोर्ड मैहर से कोई जरूरी सूचना आती है — जैसे परिवार में किसी की तबीयत खराब होना। लेकिन इनकमिंग कॉल बंद होने के कारण वह सूचना समय पर नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप उसे मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यह केवल एक व्यक्ति गोविंद की कहानी नहीं, बल्कि देश के लाखों गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों की वास्तविकता है।
उपभोक्ता अधिकार और नियम
भारत में दूरसंचार सेवाओं का नियमन भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा किया जाता है। TRAI का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और सेवा प्रदाताओं पर उचित नियम लागू करना है। ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि कंपनियाँ न्यूनतम सेवाएँ — जैसे इनकमिंग कॉल — बैलेंस समाप्त होने पर भी एक निश्चित अवधि तक चालू रखें।सरकार और नियामक संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनियाँ गरीब उपभोक्ताओं का शोषण न करें। मोबाइल सेवा आज रोटी, कपड़ा और मकान के बाद एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।
सरकार से अपेक्षा
सरकार को चाहिए कि वह इस विषय पर स्पष्ट नियम बनाए:
बैलेंस समाप्त होने पर भी एक न्यूनतम अवधि तक इनकमिंग कॉल चालू रहे।
न्यूनतम रिचार्ज की बाध्यता को कम किया जाए।
गरीब और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए विशेष योजना बनाई जाए। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर का प्रश्न है।
रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम निष्कर्षतः, रूप से कहती है कि सिम कार्ड और मोबाइल जब उपभोक्ता के हैं, तो सेवा प्रदाता कंपनियों को भी उपभोक्ता के हितों का सम्मान करना चाहिए। इनकमिंग कॉल बंद करना गरीबों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। इस पर गंभीर विचार और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।जनहित में जागरूकता ही परिवर्तन की पहली सीढ़ी है
