21फरवरी जन्म जन्मदिवस विशेष: सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा विजयराघवगढ़ का ऐतिहासिक किला
अमर शहीदों की स्मृतियों के साथ बेहूदा मजाक कर रही डबल इंजन की सरकार
(विजयराघवगढ़) सन् 1857 की क्रांति का आगाज करने वाले कटनी जिले के अमर शहीद राजा सरयू प्रसाद सिंह की स्मृति में प्रति वर्ष 21 फरवरी से विजयराघवगढ़ महोत्सव मध्यप्रदेश सरकार के कला संस्कृति विभाग स्वराज संस्थान द्वारा ,ऐतिहासिक किला परिसर में आयोजित किया जाता रहा है। इस तीन दिवसीय महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन किए जाते रहे हैं।किन्तु लगातार सरकार व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते यह आयोजन विस्मृत सा कर दिया गया है। जबकि इस ऐतिहासिक आयोजन हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रति वर्ष कई लाख रुपयों का बजट जिला प्रशासन को लगातार आबंटित किया जा रहा है।किंतु विगत कई वर्षों से डबल इंजन की सरकार होते हुए भी शहीदों की स्मृतियों के साथ छलावा किया जा रहा है।विजयराघवगढ़ महोत्सव जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की अपेक्षा का शिकार हो गया है।
1857 में देश में जब क्रांतिकारियों ने बहादुर शाह जफर को अपना सम्राट घोषित किया था और दिल्ली पर अधिकार कर लिया ,उस समय विजयराघवगढ़ के सत्रह वर्षीय नरेश सरयूप्रसाद सिंह ही एक मात्र ऐसे राजा थे ,जिन्होंने 18 जुलाई 1857 को बाड़ा कसाव , कड़क बिजली , नामक तोपे दागकर क्रांति का अभिनंदन किया था ।इस अभिनंदन के माध्यम से विदेशी सत्ता को चुनौती दी थी ।
किंतु दुर्भाग्य की बात है कि अमर शहीद राजा सरयू प्रसाद सिंह की स्मृतियों के साथ सरकार छलावा कर रही है। आज विजयराघवगढ़ का किला भी सरकार की उपेक्षा के चलते खंडहर में तब्दील हो रहा है।पहले यह ऐतिहासिक किला पुरातत्व विभाग के संरक्षण में था ,जिसकी देख भाल व उन्नयन का काम पुरातत्व विभाग करता था ।किंतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इस किले को पुरातत्व विभाग से पृथक करके यहां हेरिटेज होटल की योजना बनाई थी,और इस किले को पर्यटन विभाग को सौंपा था। तबसे यह ऐतिहासिक किला उपेक्षा के चलते खंडहर में तब्दील होता चला जा रहा है।अब इस किले में देखरेख के अभाव के कारण जहरीले अजगर ,सांपों ने अपना घर बना लिया है। साथ ही किले के कई हिस्से टूटकर खंडहर अवशेषों में तब्दील हो रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का ढिंढोरा पीटने वाली डबल इंजन की सरकार की नीतियों के चलते ऐतिहासिक धरोहरों की दुर्दशा का एक जीता जागता उदाहरण है,खंडहर में तब्दील हो रहा विजयराघवगढ़ का ऐतिहासिक किला।
ज्ञात हो कि इस किले को होटल में तब्दील कराने के प्रयास जनप्रतिनिधियों की व्यापारिक सोच के चलते इस किले को पुरातत्व विभाग से पृथक करके पर्यटन विभाग को सौंपने के बाद 90 साल की लीज पर ठेके में दिए जाने की योजना बनाई गई थी ।किंतु मुख्यमंत्री शिवराज सरकार में संस्कृति मंत्री रही उषा ठाकुर ने टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार होने के कारण टेंडर निरस्त कर दिया गया था । तब से यह किला लावारिश हालतों में दुर्भाग्य का कफ़न ओढ़कर ढहता हुआ गौरव स्तंभ बनकर रह गया है।
एक ओर सरकार ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का ढिंढोरा पीटकर करोड़ों के बजट का प्रचार प्रसार करती है वहीं अमर शहीदों की स्मृतियों के साथ छलावा करती है। विजयराघवगढ़ महोत्सव को विगत पांच वर्षों में सरकार द्वारा आबंटित राशि की उच्चस्तरीय जांच की क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है।एवं विजयराघवगढ़ किले को अविलंब पुरातत्व विभाग के अंतर्गत संरक्षित किए जाने की मांग चल रही है।
