“नज़र अंदाजी की खामोशी में बिखरते रिश्ते”….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से

मैहर वाली शारदा माता धाम से एक अनमोल चिंतन

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं, उन्हें शब्दों से नहीं बल्कि एहसासों से संभाला जाता है। जब किसी रिश्ते में एक पक्ष लगातार दूसरे को नज़रअंदाज़ करने लगता है, तो धीरे-धीरे उस रिश्ते की गर्माहट ठंडी पड़ने लगती है। नज़रअंदाज़ी कोई शोर नहीं करती, लेकिन इसका असर बहुत गहरा होता है। यह एक ऐसी खामोशी होती है जो दिल के अंदर तक चुभती है।

रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि शुरुआत में इंसान कोशिश करता है—बार-बार बात करने की, समझाने की, जुड़ाव बनाए रखने की। लेकिन जब सामने से वही बेरुखी मिलती रहती है, तो एक समय ऐसा आता है जब वो थक जाता है। फिर वह भी धीरे-धीरे दूरी बना लेता है। यह दूरी अचानक नहीं आती, बल्कि छोटे-छोटे नजरअंदाज किए गए लम्हों का परिणाम होती है।इस तरह एक खूबसूरत रिश्ता बिना किसी बड़े झगड़े या विवाद के, सिर्फ अनदेखी और खामोशी के कारण खत्म हो जाता है। यह अंत सबसे ज्यादा दर्दनाक होता है, क्योंकि इसमें कोई दोषी साफ नजर नहीं आता—बस हालात और व्यवहार ही सब कुछ कह जाते हैं।

रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम इसे एक उदाहरण के रूप इस प्रकार प्रस्तुत करते हुए कहती है कि माना कि दो बहुत अच्छे दोस्त हैं। पहले वे रोज़ बात करते थे, हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते थे। लेकिन धीरे-धीरे एक दोस्त व्यस्तता या लापरवाही के कारण दूसरे के मैसेज का जवाब देर से देने लगा, कॉल उठाना कम कर दिया, और मिलने से भी कतराने लगा। दूसरा दोस्त पहले तो समझने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब उसे बार-बार नजरअंदाजी महसूस हुई, तो उसने खुद को पीछे खींचना शुरू कर दिया। उसने भी मैसेज करना कम कर दिया, उम्मीदें छोड़ दीं, और आखिरकार दोनों के बीच दूरी इतनी बढ़ गई कि उनका रिश्ता सिर्फ एक याद बनकर रह गया।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि रिश्तों को बनाए रखने के लिए समय, ध्यान और सच्ची भावना जरूरी होती है। अगर इन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाए, तो सबसे मजबूत रिश्ता भी धीरे-धीरे टूट सकता है। इसलिए, अगर कोई रिश्ता कीमती है, तो उसे अनदेखा नहीं, बल्कि संजोकर रखना चाहिए।

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