MSP खरीदी के दावों की खुली पोल – किसान दर-दर भटकने को मजबूर, सरकार जवाब दे: जितेंद्र (जीतू)पटवारी
(भोपाल) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू)पटवारी ने प्रदेश की गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से MSP पर अनाज खरीदी के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार के राज में आज किसान दर-दर भटकने को मजबूर है।
श्री पटवारी ने कहा कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सदन में किसानों की आय 8 गुना बढ़ने और MSP पर खरीदी के दावे करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि टेलिस्कोप से ढूंढने पर भी ऐसा किसान नजर नहीं आता जिसे सही समय पर MSP का लाभ मिला हो।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान आज कर्ज में डूबा हुआ है। कर्ज की किश्त भरने की तारीख निकल चुकी है, लेकिन मोहन सरकार की लापरवाही के कारण किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर है।
श्री पटवारी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आता है, लेकिन उनके कार्यकाल में किसानों को न सुरक्षा मिल रही है, न संवेदना और न ही कोई समाधान। किसानों को बार-बार तारीख पर तारीख दी जा रही है — क्या यही उनकी आय बढ़ाने के वादों की सच्चाई है? उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ किसान खरीदी केंद्रों पर लाइन में खड़ा है और तुलाई के लिए भटक रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता से जुड़े लोगों के गोदाम पहले ही गेहूं से भर चुके हैं। क्या यही ‘अच्छे दिन’ हैं, जहां किसान परेशान और सत्ता के करीबी मालामाल हो रहे हैं?
श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के घरों में बेटियों की शादियां हैं, मजबूरी में उन्होंने साहूकारों से कर्ज लिया है। इसके बावजूद उनकी फसल व्यापारियों के माध्यम से औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है — यह किसानों के साथ खुला अन्याय है। उन्होंने कहा कि मोहन सरकार अब “वसूली की सरकार” बन चुकी है — तहसील में वसूली, लोन की वसूली और बिजली बिलों की मार से किसान त्रस्त है।
श्री पटवारी ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में मोहन सरकार सबसे असंवेदनशील मुख्यमंत्री साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब गेहूं खरीदी की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है, तब किसानों के ऋण जमा करने की तिथि को आगे नहीं बढ़ाना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आज किसान के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं — या तो वह अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचकर ऋण की किस्त चुकाए, या फिर बाजार से कर्ज लेकर भुगतान करे। दोनों ही स्थिति में किसान का नुकसान तय है और वह एक बार फिर कर्ज के कुचक्र में फंसता जा रहा है।
श्री पटवारी ने कहा कि 31 मार्च की समय-सीमा निकलने के बाद लगभग 40% किसान डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। सरकार न तो अपने वादे के अनुसार ₹2700 प्रति क्विंटल गेहूं का दाम दे रही है और न ही समय पर खरीदी शुरू कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल की तारीख दी जा रही है — यह “तारीख पर तारीख” की सरकार बन चुकी है। खरीदी शुरू न होने से मंडियों में किसानों की खुली लूट हो रही है, जो पूरी तरह से किसानों के साथ कुठाराघात है।
अंत में श्री पटवारी ने सवाल उठाया औरउन्होंने मांग की कि तत्काल प्रभाव से MSP पर पारदर्शी और समयबद्ध खरीदी सुनिश्चित की जाए, बारदाना संकट और वेयरहाउस में पहले से भरे गेहूं की निष्पक्ष जांच कराई जाए, किसानों के ऋण भुगतान और किस्तों में तत्काल राहत दी जाए। कांग्रेस पार्टी किसानों के हक के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
