कौशल विकास प्रशिक्षण 2026-27 के लिए 12 जून तक करें ऑनलाइन आवेदन

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39 ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध

मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 12 जून 2026 तक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://mpkhadigramodyog.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में सामान्य रूप से 30 प्रशिक्षणार्थियों का चयन किया जाएगा, जिसमें 30 प्रतिशत महिला प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन के लिए अभ्यर्थी का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना और आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है। साथ ही आवेदक ने पूर्व में किसी शासकीय विभाग से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्राप्त न किया हो। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे और जिला स्तरीय समिति द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन एवं पात्रता जांच के बाद चयन किया जायेगा।

आवेदकों को अपनी रुचि के अनुसार प्राथमिकता क्रम में तीन ट्रेड चुनने होंगे। चयनित प्रशिक्षणार्थियों को आवासीय प्रशिक्षण के दौरान आवास और भोजन की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण समाप्ति के बाद परीक्षा आयोजित कर ग्रेड के अनुसार छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी। आवेदन करते समय समग्र आईडी, आधार नंबर और सभी दस्तावेज स्पष्ट एवं सही रूप में अपलोड करना अनिवार्य है तथा समग्र आईडी और ई-केवाईसी संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा। अधिक जानकारी और सहायता के लिए अभ्यर्थी हेल्पलाइन नंबर 0755-2552714 पर संपर्क कर सकते हैं।

मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा कौशल विकास कार्यक्रम 2025-26 के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में कुल 39 प्रशिक्षण ट्रेड उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशिक्षण की अवधि 15 दिन से लेकर 6 माह तक है। आवेदक अपनी रुचि के अनुसार 3 ट्रेड प्राथमिकता क्रम में चुन सकते हैं।

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र

  • कम्प्यूटर हार्डवेयर रिपेयरिंग – 3 माह, 500 घंटे

  • कम्प्यूटर एकाउंट विथ टेली – 3 माह, 500 घंटे

  • मोबाइल रिपेयरिंग – 2 माह, 400 घंटे

  • डीटीपी – 3 माह, 500 घंटे

इलेक्ट्रिकल क्षेत्र

  • इलेक्ट्रीशियन घरेलू उपकरण – 3 माह, 600 घंटे

  • मोटर वायरिंग – 3 माह, 600 घंटे

  • इलेक्ट्रीशियन – 4 माह, 700 घंटे

  • इलेक्ट्रीशियन इंडस्ट्रियल – 4 माह, 700 घंटे

  • सोलर पैनल इंस्टालेशन 3 माह, 500 घंटे

गारमेंट्स एवं फैशन डिजाइनिंग

  • बेसिक सिलाई गारमेंट्स – 3 माह, 520 घंटे

  • फैशन डिजाइनिंग – 3 माह, 480 घंटे

  • हैंड एम्ब्रायडरी – 3 माह, 520 घंटे

  • जिग-जैग मशीन एम्ब्रायडरी – 3 माह, 680 घंटे

  • एडवांस फैशन डिजाइनिंग – 6 माह, 1040 घंटे

  • फैशन टेक्नोलॉजी – 6 माह, 1040 घंटे

  • ट्राउजर कटिंग, जोधपुरी जैकेट, फैब्रिक ड्रॉफ्टिंग जैसे ट्रेड भी शामिल हैं

निर्माण एवं अन्य पारंपरिक कौशल

  • प्लम्बर, राजमिस्त्री – 3 माह, 500 घंटे

  • बेकरी – 2 माह, 350 घंटे

  • अगरबत्ती निर्माण – 2 माह, 260 घंटे

  • कृत्रिम आभूषण निर्माण – 2 माह, 320 घंटे

  • जरी जरदोजी – 4 माह, 680 घंटे

लेदर एवं हैंडीक्रॉफ्ट

  • लेदर फुटवेयर, लेदर गुड्स, लेदर फुटवेयर ऑपरेटर – 3 माह, 480 से 560 घंटे

  • बाटिक प्रिंटिंग, टाई एंड डाई, ब्लॉक प्रिंटर – 3 माह, 500 घंटे

अन्य ट्रेड

  • दोना-पत्तल निर्माण – 15 दिन, 120 घंटे

  • मधुमक्खी पालन – 1 माह, 200 घंटे

  • स्पिनिंग चरखा – 1 माह, 150 घंटे

  • प्लेन वीविंग, एडवांस वीविंग, बेसिक वीविंग – 1 से 4 माह

  • रिटेल सेल एसोसिएट, असिस्टेंट फैशन सेल्स – 3 माह, 520 से 680 घंटे

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड ने नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और जनहित में उनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक और प्रभावी कार्रवाई की है। वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों से वर्षों से अवैध कब्जाधारियों को हटाया गया और भौतिक सत्यापन के बाद जरुरतमंद लोगों को संपत्ति के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया। वक़्फ़ बोर्ड की आय कैसे बड़े इस पर अन्य राज्यों की वफ्फ समितियां से चर्चा कर, राजस्व बढ़ाने के लिए कार्य किया गया। भारत सरकार द्वारा वक़्फ़ संपतियों का लेखा-जोखा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। परिणामस्वरूप म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए खुली हैं नई राहें म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि देश में वक़्फ़ संशोधन कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने कानून के मंशानुरूप कई समाजिक परिवर्तनकारी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री की इच्छा शक्ति के परिणामस्वरूप 1552 बेटा-बेटियों को ड्रॉप आउट होने से बचाया गया। वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकें, इसके लिए समुचित रुप से आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई, नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए नई राहें खुली है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 मई को रवीन्द्र भवन में भोपाल जिले के 849 मेधावी बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर सम्मानित करेंगे। यह शुरुआत है, वक़्फ़ बोर्ड मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में इस तरह बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित करेगा। मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड द्वारा ‘पढ़ो पढ़ाओ – राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनों’ जैसे नवाचार की चर्चा के बाद मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड की योजनाओं और कार्य करने की शैली को समझने के लिए अनेक राज्यों द्वारा अपने अधिकारी- कर्मचारियों को मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के कार्यालय में भेजा जा रहा है। वक़्फ़ संपत्तियां स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने के लिए उठाए गए निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को कानूनी एवं प्रशासनिक मजबूती प्राप्त हुई। वक़्फ़ माफियाओं, दागदार प्रबंधकों और अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध कठोर अभियान चलाया गया। वक़्फ़ संपत्तियों को दागदार हाथों से मुक्त कर स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए। समानांतर वक़्फ़ बोर्ड चलाकर वक़्फ़ संपत्तियों को हानि पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले प्रबंधकों के विरुद्ध कुल 41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए आरआरसी/वसूली नोटिस जारी किए गए और वसूली की कार्यवाही भी की गई। इस क्रम में वक़्फ़ यतीमखाना शाहजहांनी, भोपाल के प्रबंधक को 28 करोड़ 96 लाख रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया, जो देश के वक़्फ़ इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वसूली नोटिस माना जा रहा है। वक़्फ़ मदर गेट उज्जैन के प्रबंधन के विरुद्ध 7 करोड़ 21 लाख रुपये की वसूली के लिए कार्रवाई की गई। वक़्फ़ जामा मस्जिद, बीना बजरिया सागर के प्रबंधकों के विरुद्ध 1 करोड़ 84 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी कर कार्यवाही की गई। वक़्फ़ बड़वाली चौकी, इंदौर प्रकरण में 1 करोड़ 24 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में वक़्फ़ हिंदू अनाथालय, भोपाल के प्रबंधन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये की वसूली के लिए आरआरसी जारी की गई। वक़्फ़ अंजुमन इस्लामिया, जबलपुर के पूर्व अध्यक्ष प्यारे साहब द्वारा वक़्फ़ को पहुँचाई गई 81 लाख 43 हजार रुपये की हानि की वसूली के लिए भी नोटिस जारी किया गया। इन कार्यवाहियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नवीन वक़्फ़ बोर्ड वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति, माफिया या दागदार प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी है। अब सभी वक़्फ़ संपत्तियां दर्ज है ऑनलाइन केन्द्र सरकार द्वारा नये संशोधन कानून से वक़्फ़ संपतियों पर बैठे कब्जाधारियों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। सभी संपत्तियां ऑनलाइन दर्ज है, इस कारण कहीं कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता, इस बात की दहशत भी वक़्फ़ माफियाओं में देखने को मिली है। वक़्फ़ संपतियों के डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। इससे अनैतिक गतिविधियां करने वाले हतोत्साहित हुए। कृषि भूमियों की समय पर नीलामी की गई, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और इनका परिणाम आज सबसे सामने है। समाज के हर वर्ग में इसकी सराहना हो रही है। म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार हुआ पौधरोपण का निर्णय म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार यह निर्णय लिया गया है कि वक़्फ़ बोर्ड की निगरानी में पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में वक़्फ़ बोर्ड की जमीनों पर पांच लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। समाज के हर वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति से अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाने का अनुरोध किया जा रहा है। पौध-रोपण के बाद उनकी सही देखभाल के लिए जिलेवार जिम्मेदारी तय की जाएगी और अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड ने नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और जनहित में उनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक और प्रभावी कार्रवाई की है। वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों से वर्षों से अवैध कब्जाधारियों को हटाया गया और भौतिक सत्यापन के बाद जरुरतमंद लोगों को संपत्ति के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया। वक़्फ़ बोर्ड की आय कैसे बड़े इस पर अन्य राज्यों की वफ्फ समितियां से चर्चा कर, राजस्व बढ़ाने के लिए कार्य किया गया। भारत सरकार द्वारा वक़्फ़ संपतियों का लेखा-जोखा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। परिणामस्वरूप म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए खुली हैं नई राहें म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि देश में वक़्फ़ संशोधन कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने कानून के मंशानुरूप कई समाजिक परिवर्तनकारी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री की इच्छा शक्ति के परिणामस्वरूप 1552 बेटा-बेटियों को ड्रॉप आउट होने से बचाया गया। वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकें, इसके लिए समुचित रुप से आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई, नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए नई राहें खुली है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 मई को रवीन्द्र भवन में भोपाल जिले के 849 मेधावी बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर सम्मानित करेंगे। यह शुरुआत है, वक़्फ़ बोर्ड मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में इस तरह बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित करेगा। मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड द्वारा ‘पढ़ो पढ़ाओ – राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनों’ जैसे नवाचार की चर्चा के बाद मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड की योजनाओं और कार्य करने की शैली को समझने के लिए अनेक राज्यों द्वारा अपने अधिकारी- कर्मचारियों को मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के कार्यालय में भेजा जा रहा है। वक़्फ़ संपत्तियां स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने के लिए उठाए गए निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को कानूनी एवं प्रशासनिक मजबूती प्राप्त हुई। वक़्फ़ माफियाओं, दागदार प्रबंधकों और अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध कठोर अभियान चलाया गया। वक़्फ़ संपत्तियों को दागदार हाथों से मुक्त कर स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए। समानांतर वक़्फ़ बोर्ड चलाकर वक़्फ़ संपत्तियों को हानि पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले प्रबंधकों के विरुद्ध कुल 41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए आरआरसी/वसूली नोटिस जारी किए गए और वसूली की कार्यवाही भी की गई। इस क्रम में वक़्फ़ यतीमखाना शाहजहांनी, भोपाल के प्रबंधक को 28 करोड़ 96 लाख रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया, जो देश के वक़्फ़ इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वसूली नोटिस माना जा रहा है। वक़्फ़ मदर गेट उज्जैन के प्रबंधन के विरुद्ध 7 करोड़ 21 लाख रुपये की वसूली के लिए कार्रवाई की गई। वक़्फ़ जामा मस्जिद, बीना बजरिया सागर के प्रबंधकों के विरुद्ध 1 करोड़ 84 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी कर कार्यवाही की गई। वक़्फ़ बड़वाली चौकी, इंदौर प्रकरण में 1 करोड़ 24 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में वक़्फ़ हिंदू अनाथालय, भोपाल के प्रबंधन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये की वसूली के लिए आरआरसी जारी की गई। वक़्फ़ अंजुमन इस्लामिया, जबलपुर के पूर्व अध्यक्ष प्यारे साहब द्वारा वक़्फ़ को पहुँचाई गई 81 लाख 43 हजार रुपये की हानि की वसूली के लिए भी नोटिस जारी किया गया। इन कार्यवाहियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नवीन वक़्फ़ बोर्ड वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति, माफिया या दागदार प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी है। अब सभी वक़्फ़ संपत्तियां दर्ज है ऑनलाइन केन्द्र सरकार द्वारा नये संशोधन कानून से वक़्फ़ संपतियों पर बैठे कब्जाधारियों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। सभी संपत्तियां ऑनलाइन दर्ज है, इस कारण कहीं कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता, इस बात की दहशत भी वक़्फ़ माफियाओं में देखने को मिली है। वक़्फ़ संपतियों के डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। इससे अनैतिक गतिविधियां करने वाले हतोत्साहित हुए। कृषि भूमियों की समय पर नीलामी की गई, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और इनका परिणाम आज सबसे सामने है। समाज के हर वर्ग में इसकी सराहना हो रही है। म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार हुआ पौधरोपण का निर्णय म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार यह निर्णय लिया गया है कि वक़्फ़ बोर्ड की निगरानी में पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में वक़्फ़ बोर्ड की जमीनों पर पांच लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। समाज के हर वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति से अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाने का अनुरोध किया जा रहा है। पौध-रोपण के बाद उनकी सही देखभाल के लिए जिलेवार जिम्मेदारी तय की जाएगी और अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।