बरही में पेट्रोल डीजल नहीं… जनता का धैर्य हो रहा ड्राई” , घंटों लाइन में तड़प रही जनता, लेकिन क्रेशर और माइंस के ट्रकों पर मेहरबान पेट्रोल पंप!

बरही। कटनी जिले के बरही में इन दिनों पेट्रोल पंपों की तस्वीरें व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। आम आदमी अपनी मोटरसाइकिल में 2 लीटर पेट्रोल डलवाने एवं ऑटो मालिक डीजल डलवाने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते है, लेकिन जैसे ही किसी क्रेशर प्लांट, माइंस या उद्योगपति का भारी वाहन पंप पर पहुंचता है, नियम-कायदे और “तेल संकट” अचानक गायब हो जाता है!

बरही के एचपी, भारत और इंडियन पेट्रोल पंपों में बीते कई दिनों से चाहे जिस वक्त “ड्राई” का खेल शुरू हो जाता है। मोटर साइकिल चालक और ऑटो चालकों को कह दिया जाता है कि पेट्रोल डीजल सीमित है, सप्लाई कम है, इंतजार करना पड़ेगा… लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह कमी सिर्फ गरीब, किसान, मजदूर और दो पहिया वाहन चालकों समेत गरीब ऑटो चालकों के लिए ही क्यों है?

बता दें कि खितौली मार्ग मैहर मार्ग स्थित पेट्रोल पंपो में सैकड़ों मोटरसाइकिलें एवं ऑटो लाइन में खड़ी रहती हैं । लोग धूप में पसीना बहाते रहते हैं लेकिन पेट्रोल डीजल की बूंद-बूंद के लिए तरसते नजर आते हैं एक बाइक चालक को पेट्रोल डलवाने में लगभग एक घंटा लग जाता है और ऑटो मालिकों को कह दिया जाता है कि डीजल ही नहीं है । वहीं दूसरी तरफ बड़े ट्रकों और डंपरों को बिना किसी देरी के तेल भर दिया जाता है ।

लोगों का आरोप है कि पंप संचालकों द्वारा आम उपभोक्ताओं से कटौती कर उद्योगपतियों और क्रेशर कारोबारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। कुटेश्वर लाइम स्टोन, करौंदी, बिचपुरा और ददरा क्षेत्र में चल रहे क्रेशर प्लांटों के वाहनों के पहिए लगातार दौड़ रहे हैं, लेकिन आम जनता की बाइकें और ऑटो लाइन में खड़ी-खड़ी बंद हो रही हैं।

यदि वास्तव में तेल का संकट है तो सबसे पहले जरूरतमंद आम जनता को राहत मिलनी चाहिए थी। क्योंकि दो पहिया वाहन आम आदमी की जिंदगी का सहारा हैं — कोई नौकरी पर जाता है, कोई अस्पताल, कोई खेत, तो कोई रोजी-रोटी कमाने उसी प्रकार ऑटो मालिकों कि रोजी रोटी का सवाल है । लेकिन यहां तस्वीर उल्टी दिखाई दे रही है…

“जनता लाइन में, और रसूखदार सीधे मशीन पर!”
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौट रहे हैं। मजबूरी में गांवों की किराना दुकानों से बोतलों में महंगे दामों पर पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है। आखिर यह स्थिति किसकी नाकामी है?
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर खड़ा हो रहा है।
क्या जिला प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
क्या पेट्रोल पंपों की मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या आम जनता की परेशानी की कोई कीमत नहीं बची है

बरही में अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि “तेल का संकट नहीं है… व्यवस्था की नीयत में संकट है!”
यदि जल्द ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो जनता का गुस्सा कभी भी सड़कों पर फूट सकता है। क्योंकि अब सवाल सिर्फ पेट्रोल का नहीं… बल्कि आम आदमी के अधिकार और सम्मान का बन चुका है।

✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
          बरही

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