मतदान सबसे पवित्र अधिकार है, उससे कोई भी पात्र मतदाता वंचित न रहे : राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने की स्थानीय निकायों की मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यों की समीक्षा

(भोपाल) मतदान सबसे पवित्र अधिकार है, उससे कोई भी पात्र मतदाता वंचित नहीं रहे। साथ ही कोई भी अपात्र मतदाता मतदान के अधिकार का उपयोग नहीं कर सके। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव ने यह निर्देश नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान दिये। समीक्षा राज्य निर्वाचन आयोग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गयी।

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि नाम जोड़ने और हटाने का कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा करें। इस कार्य की सघन मॉनीटरिंग की जाये। हर जिले में स्टेंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित कर जन-प्रतिनिधियों को पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की उपेक्षा नहीं होनी चाहिये। अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर नाम हटाने की कार्यवाही करें। प्राधिकृत कर्मचारियों के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिये सुपरवाइजर की नियुक्ति करें। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की डेसबोर्ड से ऑनलाइन नियमित मॉनीटरिंग करें। दावे-आपत्ति और अपील के प्रकरणों का निराकरण सहित सभी कार्यवाहियाँ समय-सीमा में सुनिश्चित करें।

सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने कहा कि मतदाता सूची से नाम काटने के पहले पूरी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि प्रारूप मतदाता सूची में दावे-आपत्ति 15 जून तक लिये जायेंगे। दावे-आपत्तियों का निराकरण 25 जून तक किया जायेगा और फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 18 जुलाई को किया जायेगा।

बैठक में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्रीमती संजू कुमारी, श्री सुतेश शाक्य, श्री मुकुल गुप्ता एवं विधि अधिकारी श्री प्रदीप शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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