“भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाएं नहीं संभाल पा रही, इसलिए उन्हें निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर रही है” — जीतू पटवारी

 (भोपाल) राजगढ़ जिले के छापीहेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग 30 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने और उसके कारण टीकाकरण के लिए सुरक्षित रखी गई महत्वपूर्ण वैक्सीनों के खराब होने के दावों ने मध्य प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडरा रहे गंभीर संकट का संकेत है।

सबसे गंभीर बात यह है कि मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बयान ही एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। जहां स्थानीय बीएमओ वैक्सीन खराब होने की पुष्टि कर रहे हैं, वहीं जिला टीकाकरण अधिकारी सभी वैक्सीन सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में जनता आखिर किस पर विश्वास करे?

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब भाजपा सरकार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह निर्णय स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने का नहीं, बल्कि अपनी विफलताओं से बचने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार सरकारी अस्पतालों में बिजली, डॉक्टर, दवाइयां, उपकरण और जवाबदेही तक सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, तो उसका समाधान निजीकरण नहीं बल्कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना है।

कांग्रेस के सवाल
– क्या अस्पताल में 30 घंटे तक बिजली गुल रहने के बावजूद कोई वैकल्पिक बिजली व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी?
– कोल्ड चेन जैसी संवेदनशील व्यवस्था के लिए बैकअप सिस्टम क्यों नहीं था?
– यदि वैक्सीन खराब हुई हैं तो उनकी आर्थिक क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा?
– जिन बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण प्रभावित हुआ, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
– क्या सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी?

श्री पटवारी ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, संसाधनों की कमी और लापरवाही के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कहीं दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की जान गई, तो कहीं अस्पतालों की बदइंतजामी ने मानवता को शर्मसार किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें निजी कंपनियों के हवाले करने की नीति पर चल रही है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि—
“स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।”

कांग्रेस की प्रमुख मांगें
1. छापीहेड़ा वैक्सीन प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
2. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
3. दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
4. सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोल्ड चेन हेतु अनिवार्य बैकअप बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
5. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण संबंधी निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए।
6. स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों को भरकर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए।

श्री पटवारी ने कहा कि अस्पताल मुनाफा कमाने के केंद्र नहीं, बल्कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के केंद्र होते हैं। कांग्रेस पार्टी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का पुरजोर विरोध करेगी और जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष जारी रखेगी।
✍️ संतोष प्रसाद तिवारी
RPKP INDIA NEWS
          भोपाल

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