बरही की जीवनदायिनी नदियों पर रेत माफियाओं का कहर! , अस्वीकृत खदानों से दिन-रात हो रहा उत्खनन, करोड़ों के काले कारोबार पर आखिर किसका संरक्षण?

(कटनी) बरही तहसील एवं थाना क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियां इन दिनों अवैध रेत उत्खनन की मार झेल रही हैं। छिंदहाई, पिपरिया, नदावन, ताली, रोहनिया, जाजागढ़, बहिरघटा सहित कई गांवों की नदियां रात के अंधेरे में रेत माफियाओं का अड्डा बन चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन स्थानों से रेत निकाली जा रही है, वे खदानें स्वीकृत नहीं हैं, इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग से कथित सेटिंग के सहारे खुलेआम अवैध उत्खनन जारी है।

सूत्रों का दावा है कि 30 जून से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियम प्रभावी होने की संभावना है। इसी के पहले तेज गति से रेत निकालकर भारी मात्रा में भंडारण और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये का यह खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन कार्रवाई केवल नाम मात्र की दिखाई देती है।

रात होते ही नदियां बन जाती हैं रेत माफियाओं का अड्डा

स्थानीय लोगों के अनुसार जैसे ही शाम ढलती है, ट्रैक्टर-ट्रालियां और अन्य वाहन नदियों के भीतर उतरने लगते हैं। पूरी रात मशीनों और ट्रैक्टरों की आवाज सुनाई देती है और सुबह होने से पहले अधिकांश वाहन गांव-गांव रेत पहुंचा देते हैं। कुछ स्थानों पर रेत का अवैध भंडारण भी किया जाता है, जहां से मांग के अनुसार बाद में सप्लाई की जाती है।

बिना स्वीकृत खदानों से जारी है उत्खनन, फिर भी कार्रवाई केवल दिखावे की?

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्थानों से रेत निकाली जा रही है, उनमें कई खदानें स्वीकृत नहीं हैं। इसके बावजूद धड़ल्ले से ट्रैक्टर नदी के भीतर उतर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर सप्ताह भर में एक ट्रैक्टर पकड़कर थाना परिसर में खड़ा करा दिया जाता है, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को यह संदेश दिया जा सके कि लगातार कार्रवाई की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि महीने भर में एक या दो ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि प्रतिदिन दर्जनों वाहन बिना किसी रोक-टोक के रेत का परिवहन करते रहते हैं।

बरही नगर से होकर प्रतिदिन निकल रहे 12 से 15 ट्रैक्टर, न टीपी देखी जाती और न रोकने का प्रयास

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरही नगर से होते हुए विजयराघवगढ़ मार्ग, कटनी मार्ग और मैहर मार्ग को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 12 से 15 रेत से लोड ट्रैक्टर-ट्रालियां गुजरती हैं। इन वाहनों की न तो ट्रांजिट पास (टीपी) की जांच की जाती है और न ही उन्हें रोकने का कोई गंभीर प्रयास दिखाई देता है। हैरानी की बात यह है कि कुछ ट्रैक्टर तहसील कार्यालय और थाना परिसर के सामने से होकर गुजरते हैं, लेकिन उन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इससे आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस कारोबार को किसका संरक्षण प्राप्त है।

उमरिया जिले से गुजर रहे दर्जनों हाइवा, नगर में लग रहा घंटों जाम

स्थानीय लोगों के अनुसार उमरिया जिले की ओर से भी दर्जनों से अधिक रेत से लोड हाइवा प्रतिदिन बरही नगर के मुख्य चौराहे से गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण कई बार घंटों जाम की स्थिति बन जाती है और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और राहगीरों को भी इससे काफी दिक्कत होती है।

क्या नेताओं का नाम लेकर चल रहा है यह खेल?

बरही क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हैं। जिन लोगों का इस कारोबार से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, उनका कहना है कि भाजपा के कुछ छोटे स्तर के नेताओं, पूर्व पार्षदों और कुछ सरपंचों के ट्रैक्टर भी इस कारोबार में संचालित होने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि कुछ लोग प्रभावशाली व्यक्तियों और नेताओं का नाम लेकर दबदबा बनाते हैं, जिससे कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर भी दबाव बनने की बात कही जाती है। यदि ऐसा है तो इससे जनप्रतिनिधियों की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जीवनदायिनी नदियों का अस्तित्व संकट में

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार हो रहे अनियंत्रित उत्खनन से नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता है, किनारों का कटाव बढ़ता है और भू-जल स्तर प्रभावित होता है। बरही क्षेत्र की ये नदियां सैकड़ों परिवारों की जीवनरेखा हैं। खेती, पशुपालन और पेयजल की आवश्यकताएं इन्हीं पर निर्भर हैं। यदि इसी प्रकार बिना नियंत्रण के उत्खनन जारी रहा तो आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन गंभीर रूप ले सकता है।

शिकायतें बहुत, लेकिन कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन लोगों को केवल आश्वासन ही मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और यह धारणा मजबूत हो रही है कि विभागीय उदासीनता के कारण रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

सबसे बड़ा सवाल

क्या बरही क्षेत्र की नदियां रेत माफियाओं के भरोसे छोड़ दी गई हैं?

क्या अस्वीकृत खदानों से हो रहे उत्खनन पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा कर रही है?

क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी?

क्या नेताओं की साख का इस्तेमाल कर कुछ लोग शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं?

क्या जीवनदायिनी नदियों को बचाने के लिए कोई बड़ा अभियान चलेगा?

बहरहाल, छिंदहाई, पिपरिया, नदावन, ताली, रोहनिया, जाजागढ़ और बहिरघटा की नदियां वर्षों से अवैध उत्खनन की मार झेल रही हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्या करोड़ों के इस काले कारोबार पर प्रभावी अंकुश लग पाता है या नहीं।

✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
           बरही

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