आदिवासी भूमि हड़पने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी, अमुवारी प्रकरण ने दिल्ली तक मचाई हलचल
(विजयराघवगढ़) ग्राम अमुवारी में आदिवासी समुदाय की भूमि पर कथित अवैध कब्जों का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनहित मुद्दों को उठाने वाले नागरिकों की लगातार शिकायतों के बाद भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम अमुवारी के खसरा क्रमांक 244, 295, 297 एवं 298 राजस्व अभिलेखों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के भू-स्वामियों के नाम दर्ज हैं। आरोप है कि इन भूमि खंडों पर प्रभावशाली गैर-आदिवासी व्यक्तियों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए मकान, बाउंड्री वॉल एवं अन्य स्थायी निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक गांव या पंचायत तक सीमित समस्या नहीं है। विजयाराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न औद्योगिक एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी भूमि के हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े अनेक मामले सामने आ रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उठीं ये प्रमुख मांगें
* अमुवारी के विवादित खसरों का राजस्व, पुलिस एवं पंचायत विभाग के संयुक्त दल द्वारा तत्काल सीमांकन कराया जाए।
* अवैध कब्जों को हटाकर भूमि वास्तविक आदिवासी भू-स्वामियों को वापस सौंपी जाए।
* पूरे विजयाराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी भूमि के हस्तांतरण एवं कब्जों की जांच हेतु विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए।
* दोषी अधिकारियों, भू-माफियाओं एवं अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं।
* आदिवासी भूमि संरक्षण संबंधी कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक जनसमर्थन के साथ कलेक्ट्रेट घेराव, धरना-प्रदर्शन एवं लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
