विजयराघवगढ़ के घुघरी-कांटी गांव के जंगल में 14 वन्यजीवों की मौत से हड़कंप, तालाब का पानी विषैला होने की जताई जा रही आशंका

शिकारियों की क्रूरता बनी मूक प्राणियों की जान की दुश्मन, 12 चीतल और 2 सांभर तड़प तड़प कर हुए काल कवलित, डॉग स्क्वॉड की मदद से पकड़े गए 3 आरोपी

(विजयराघवगढ़) कटनी जिले के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत घुघरी-कांटी गांव के समीप जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में 14 वन्यजीवों की मौत होने से हड़कंप मच गया। इस घटना ने वन विभाग के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमियों को भी हिलाकर रख दिया है। जिन वन्योरणियों की मौतें हुई हैं उनमें 12 चीतल और 2 सांभर शामिल हैं।शिकारियों द्वारा तालाब के पानी में कोई जहर घोला गया होगा ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है। वन विभाग ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए डॉग स्क्वॉड की मदद ली और कुछ ही घंटों में ही तीन आरोपियों को दबोच लिया है।

इस संबंध में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार, गत सुबह जब वन अमला नियमित गश्त पर था, तभी घुघरी-कांटी गांव के पास जंगल में एक तालाब के किनारे लगभग 100 मीटर के दायरे में 12 चीतल और 2 सांभर मृत अवस्था में पड़े मिले। यह नजारा देख कर वन अमले के होश उड़ गए। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत की खबर मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और तहकीकात शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तुरंत खोजी कुत्ते की मदद ली। मौके से सुराग मिलते ही डॉग स्क्वॉड सीधे घुघरी गांव में एक संदिग्ध के घर जाकर रुक गया। वन विभाग की टीम ने जब उस घर की तलाशी ली, तो वहाँ शिकार के पुख्ता सबूत हाथ लगे। घर से ताजा खून के निशान, वन्यजीवों के बाल और मांस, शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे और अन्य उपकरण बरामद हुए।

मुख्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूलते हुए साथियों के नाम बता दिए। पकड़े गए आरोपी की निशानदेही पर टीम ने तत्काल दबिश देकर दो अन्य सह-आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

वन विभाग ने सभी 14 मृत वन्यजीवों का डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराने के बाद ससम्मान उनका अंतिम संस्कार कर दिया है। इसके साथ ही, तालाब के पानी के नमूने लेकर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिए गए हैं।
चूंकि पानी जहरीला होने की पूरी आशंका है, इसलिए एहतियात के तौर पर वन विभाग ने उस प्रभावित जल स्रोत (तालाब) को अस्थायी रूप से चारों तरफ से बंद कर दिया है। तालाब के पास कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है ताकि जंगल का कोई दूसरा वन्यजीव या ग्रामीणों के मवेशी उस दूषित पानी के संपर्क में न आएं। पूरे वन क्षेत्र में सर्चिंग और गश्त को भी बढ़ा दिया गया है। वन विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में डीएफओ गर्वित गंगवार का कहना था कि मौके पर मिले मृत वन्यजीवों के मुंह से झाग निकल रहा था। प्रथम दृष्टया तालाब के पानी की स्थिति भी संदिग्ध लग रही है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि पानी में कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया था। वन्य प्राणियों की मौत के असली कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

✍️ अजय त्रिपाठी
       न्यूज एडिटर
RPKP INDIA NEWS

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें