युवाओं के हक, रोजगार और शिक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई: जीतू पटवारी

युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी:जयवर्धन सिंह

युवा स्वाभिमान साइक्लोथॉन से उठेगी बदलाव की आवाज़: प्रियव्रत सिंह

(भोपाल) मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश के युवाओं से जुड़े मुद्दों, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक, बेरोजगारी तथा कांग्रेस पार्टी के प्रस्तावित अभियान और संकल्पों पर विस्तार से अपनी बात रखी गई।

इस अवसर पर मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, जिला भोपाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना सहित युवा मामलों की समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा:
मेरे प्रिय नौजवान साथियों, मीडिया के बंधुओं आज मैं आपके सामने एक बेहद गंभीर, संवेदनशील और हमारे देश व प्रदेश के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाले मुद्दों पर बात करने आया हूँ। आज मध्य प्रदेश और देश की शिक्षा प्रणाली, भर्ती परीक्षाओं में हो रहे महा-घोटालों और भयंकर बेरोजगारी संकट ने हमारे करोड़ों युवाओं के सपनों को मटियामेट कर दिया है।

1. NEET परीक्षा संकट और राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक का तांडव
साथियों, आज परीक्षाओं में हो रही धांधली के कारण पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शर्म की बात है कि NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी के कारण देश के 17 होनहार छात्रों ने आत्महत्या कर ली, जिनमें हमारे मध्य प्रदेश के मासूम छात्र भी शामिल थे। पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल में 85 बार पेपर लीक हुए हैं, जिससे देश भर के लगभग 2 करोड़ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।
अकेले 2026 के NEET पेपर लीक में 20 से 24 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। एक-एक पेपर को 30-30 लाख रुपये में सरेआम बेचा गया! और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें पकड़े गए अपराधी मुख्य रूप से भाजपा शासित राज्यों—हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र से हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान और युवाओं के हक की लड़ाई को मजबूत करने के लिए हमारे नेता राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी ने ‘छात्रों की गूंज’ नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।

2. मध्य प्रदेश: परीक्षा घोटालों की “नर्सरी”
हमारे मध्य प्रदेश को आज पूरे देश में इन परीक्षा और भर्ती घोटालों की “नर्सरी” या शरण स्थली कहा जाने लगा है। राज्य में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक लंबा और काला इतिहास है:
2013 का व्यापम घोटाला: जिसने मेडिकल, पुलिस, शिक्षक और वनरक्षक भर्ती को बर्बाद किया।
2021 का कृषि विस्तार अधिकारी घोटाला।
2023 का पटवारी भर्ती घोटाला: जिसमें फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर नौकरियां बांटी गईं।
2024-2026 का नर्सिंग घोटाला और 2025 का फर्जी मार्कशीट घोटाला।

दुख की बात देखिए, हक मांगने वाले पीड़ित छात्रों और उनके अभिभावकों पर तो हज़ारों FIR दर्ज कर दी गईं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मोहन यादव की सरकारों ने मुख्य आरोपियों को खुला संरक्षण दिया। हद तो तब हो गई जब हाईकोर्ट ने व्यापम के मुख्य आरोपियों को बरी किया, तो राज्य सरकार ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ कोई अपील ही नहीं की!

3. अपराधियों को सजा के बजाय उच्च पदों का ईनाम
मोहन यादव सरकार में सजा मिलने के बजाय, व्यापम और अन्य घोटालों से जुड़े भ्रष्टाचारियों को प्रभावशाली पदों पर पुरस्कृत किया जा रहा है:
अजय गोयनका और सुधीर शर्मा (व्यापम के मुख्य आरोपी) को सरकार के प्रमुख या मुख्यमंत्री के खास सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया।
सुधीर भदोरिया, जो व्यापम कांड के समय परीक्षा नियंत्रक (Examination Controller) थे, उन्हें RGPV के अकादमिक संस्थान का प्रमुख (Director) बना दिया गया।
राजेश लाल मेहरा को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि उन्होंने अपने जीवन में कभी पीएससी की परीक्षा पास ही नहीं की थी! उनका चयन केवल साक्षात्कार के आधार पर हुआ और सरकार ने उनकी नियुक्ति के खिलाफ आई सभी शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

4. भयंकर बेरोजगारी और आंकड़ों की बाजीगरी
इन घोटालों और भर्ती की विफलताओं के कारण आज मध्य प्रदेश में 1 करोड़ से अधिक युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकारी पोर्टल पर कुल मिलाकर लगभग 62.75 लाख बेरोजगार युवाओं का पंजीकरण हुआ। यह संकट हर वर्ग में है—जिसमें 10.46 लाख OBC, 4.69 लाख SC, 4.83 लाख ST और 6.34 लाख सामान्य वर्ग के युवा शामिल हैं।
इसके ऊपर से, यह सरकार आंकड़ों में हेराफेरी करके इस संकट को छिपाने का पाप कर रही है। केंद्र के आर्थिक सर्वेक्षण ने मध्य प्रदेश में 33.13 लाख बेरोजगार बताए, जबकि राज्य विधानसभा में सरकार ने यह आंकड़ा 25.75 लाख बताया। यानी 7.38 लाख बेरोजगार युवाओं का कोई अता-पता ही नहीं है! राज्य के रोजगार पोर्टल पर अचानक बेरोजगारों की संख्या 25.35 लाख से गिरकर 17.90 लाख हो गई, जबकि सरकार ने यह नहीं बताया कि इतने लोगों को रोजगार कहाँ मिला? साफ है कि इस सरकार की प्राथमिकता रोजगार पैदा करना नहीं है, बल्कि “बेरोजगारों को कागजों से मिटाना” और उनके आंकड़ों को कब्रिस्तान भेज देना है।

5. रोजगार के अधूरे और झूठे वादे
मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने वादा किया था कि वे 5 साल में 2.5 लाख सरकारी नौकरियां देंगे। आज इस वादे को किए हुए ढाई साल बीत चुके हैं। समय के हिसाब से अब तक 1.25 लाख नौकरियां मिल जानी चाहिए थीं, लेकिन सरकार का यह लक्ष्य पूरी तरह से विफल और खोखला साबित हुआ है।
कांग्रेस पार्टी के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है। यदि सभी विभागों में 100% पदों को भरा जाए, तो प्रदेश को सुचारू रूप से चलाने के लिए 12 लाख 9,000 कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 7 लाख 21,000 लोग ही काम कर रहे हैं।

पदों की भारी रिक्ति: प्रदेश में लगभग 4,87,000 (लगभग 40%) पद खाली हैं। इसका मतलब है कि हर 10 में से 4 कुर्सियां खाली हैं और बचे हुए कर्मचारियों पर काम का भारी बोझ है।

विभागवार रिक्तियां: स्कूल शिक्षा विभाग (26,210), पुलिस/गृह विभाग (20,470), लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (15,000), राजस्व विभाग (8,000), पंचायत ग्रामीण विकास (6,500) और उच्च शिक्षा विभाग (6,400) में हजारों पद खाली पड़े हैं।

‘डाइंग कैटेगरी’ (पद समाप्ति): सरकार ने चालबाजी करते हुए 2 लाख पदों को ‘डाइंग कैटेगरी’ में डाल दिया है, यानी इन पदों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया ताकि युवाओं को नौकरी न देनी पड़े।

खराब भर्ती रिकॉर्ड: MPPSC का ट्रैक रिकॉर्ड इतना शर्मनाक रहा है कि पिछले 11 वर्षों में इसके माध्यम से केवल 20,510 पद ही भरे जा सके हैं।

6. प्राइवेट सेक्टर में नौकरियों के खोखले दावे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन्वेस्टर मीट के जरिए निजी क्षेत्र में रोजगार देने के बड़े-बड़े लेकिन झूठे वादे कर रहे हैं। उन्होंने एक ही साल में कई लोकलुभावन वादे किए, जो पहले 10,000 रोजगार देने से शुरू हुए और झूठ की सीढ़ी चढ़ते हुए अंततः 26 लाख 41,875 नौकरियों के दावे तक पहुंच गए। दावा किया गया कि 30.77 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा, लेकिन धरातल पर वास्तविकता में पैदा हुआ रोजगार “शून्य” (जीरो) रहा।
कसर तब पूरी हो गई जब मुख्यमंत्री जी ने खुद एक पॉडकास्ट में खुलेआम बयान दे दिया कि “मेरा सरकारी नौकरी में इंटरेस्ट ही नहीं है!” इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने प्रदेश के 1.5 करोड़ युवाओं के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है और उनमें भारी निराशा पैदा की है।

7. भर्ती परीक्षाओं (MPPSC और व्यापम) की व्यवस्थागत बीमारियां
आज प्रदेश की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली वेंटिलेटर पर है:
अनियमितता और देरी: नियमित अंतराल पर परीक्षाएं नहीं होतीं और परीक्षा तिथियों को खिलौने की तरह लगातार बदला जाता है। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बीच तैयारी का समय तक नहीं दिया जाता।

पारदर्शिता की कमी: 87-13 के OBC आरक्षण को लेकर सरकार ने जानबूझकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। 2019 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा की कॉपियां न दिखाना और मार्कशीट सार्वजनिक न करना इनकी बदनीयती को दर्शाता है।

आर्थिक बोझ: हर अलग परीक्षा के लिए गरीब छात्रों से बार-बार फॉर्म की मोटी फीस वसूली जाती है।

घोटाले और धोखाधड़ी: 2023 की पुलिस आरक्षक भर्ती में आधार कार्ड की धोखाधड़ी कर बाहरी लोगों को परीक्षा में बैठाया गया। इसके अलावा, पटवारी भर्ती घोटाले की जांच करने वाले ‘जस्टिस वर्मा आयोग’ की रिपोर्ट को आज तक जनता के सामने सार्वजनिक नहीं किया गया है। आखिर सरकार क्या छुपाना चाहती है?

कांग्रेस पार्टी के प्रस्तावित सुधार और हमारी माँगें:

हम युवाओं के भविष्य को इस तरह बर्बाद होते नहीं देख सकते। कांग्रेस पार्टी मोहन यादव सरकार के सामने निम्नलिखित माँगें रखती है और सरकार आने पर इन्हें लागू करने का संकल्प लेती है:

1. यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड: सरकार को ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ का ढोल पीटने से पहले ‘यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड’ लागू करना चाहिए, ताकि केजी (KG) से लेकर पीजी (PG) तक देश और प्रदेश के सभी बच्चों को एक समान और मुफ्त शिक्षा मिल सके।

2. सख्त भर्ती समय-सीमा (Recruitment Law): एक वार्षिक भर्ती कैलेंडर सख्ती से लागू हो, जिसमें परीक्षा की तिथियां न बदली जाएं। कोई भी पद 2 वर्ष से अधिक खाली न रहे और भर्ती के लिए एक कड़ा ‘समय-सीमा कानून’ बनाया जाए।

3. छात्रों को आर्थिक राहत (वन-टाइम फीस): बार-बार फीस वसूलने की लूट बंद की जाए और ‘वन टाइम फीस’ प्रणाली लागू की जाए। यदि कोई परीक्षा निरस्त या रद्द होती है, तो बच्चों को उनकी फीस तुरंत ब्याज समेत वापस की जाए।

4. परीक्षा माफियाओं पर लगाम: पेपर लीक से जुड़ी किसी भी घटना का निपटारा 30 दिन के भीतर हो। परीक्षा माफियाओं को जेल भेजने के लिए (MP-MLA कोर्ट की तर्ज पर) ‘विशेष न्यायालय’ स्थापित किए जाएं।

5. स्वतंत्र भर्ती आयोगों का गठन: चुनाव आयोग की तरह एक पूरी तरह से स्वायत्त और स्वतंत्र भर्ती आयोग बनाया जाए, जिसमें सरकार का कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। विश्वविद्यालयों में भाई-भतीजावाद और राजनीतिक नियुक्तियों को रोकने के लिए अलग से ‘विश्वविद्यालय भर्ती आयोग’ बने।

6. छात्र संघ चुनाव: छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल करने, उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़ने और अपना नेतृत्व चुनने के लिए कॉलेजों में छात्र संघ के चुनाव तुरंत पुनः शुरू किए जाएं।

7. पूर्ण पारदर्शिता: पूरी भर्ती प्रक्रिया का पब्लिक ऑडिट हो, पूरी तरह पारदर्शी मेरिट सूची सार्वजनिक की जाए और डिजिटल रूप से दस्तावेजों का पारदर्शी सत्यापन हो।

मैं मध्य प्रदेश के समस्त युवाओं, छात्रों और अभिभावकों को विश्वास दिलाता हूँ कि कांग्रेस पार्टी आपके हक की इस लड़ाई में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम इस भ्रष्ट सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे, लेकिन आपके भविष्य को अंधकार में नहीं जाने देंगे!

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि
आज मैं आपके बीच एक ऐसे विषय पर बात करने आया हूँ, जिसने हमारे देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों की रातों की नींद उड़ा दी है। भाजपा सरकार ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। मैं आपके सामने सिलसिलेवार तरीके से इस सरकार के काले कारनामों को उजागर करना चाहता हूँ।
1. शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और NTA के गठन की कड़वी सच्चाई

साथियों, साल 2014 तक हमारे देश में शैक्षणिक और रोजगार से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण परीक्षाएं पूरी तरह से सरकारी संस्थाओं द्वारा ही आयोजित की जाती थीं, जिनमें पारदर्शिता होती थी। लेकिन 2017-18 के बीच भाजपा सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया। और इतिहास गवाह है कि इसके बाद से ही देश में लगातार पेपर लीक और घोटालों की बाढ़ आ गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि NTA को आज तक एक वैधानिक (Statutory) संस्था का दर्जा नहीं दिया गया है। इसकी कार्यप्रणाली ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) जैसी अपारदर्शी है, जहाँ कोई भी सांसद या जनप्रतिनिधि NTA के कामकाज और निर्णयों के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं कर सकता। इसे पूरी तरह जवाबदेही से बाहर रखा गया है।

2. NTA अध्यक्ष प्रदीप जोशी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप

आप खुद देखिए कि इस संस्था की कमान किसके हाथों में है। NTA के वर्तमान अध्यक्ष प्रदीप जोशी के पिछले कार्यकाल दागदार रहे हैं। साल 2006 से 2011 के बीच जब वे मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के अध्यक्ष थे, तब उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे।

हैरानी की बात यह है कि उन भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने के बजाय, भाजपा सरकार ने उन्हें लगातार प्रमोट किया। उन्हें पहले छत्तीसगढ़ PSC का अध्यक्ष बनाया गया, फिर UPSC का सदस्य और अध्यक्ष नियुक्त किया गया, और अंततः 2023 में देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी यानी NTA का अध्यक्ष बना दिया गया। यह दागियों को पुरस्कृत करने वाली सरकार है।

3. NEET 2024 घोटाला और जांच के नाम पर ढोंग

साल 2024 की NEET परीक्षा में जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। बड़े स्तर पर पेपर लीक हुआ, जिसका ऐतिहासिक खुलासा तब हुआ जब देश के इतिहास में पहली बार 65 परीक्षार्थियों ने 100% अंक (टॉप रैंक) प्राप्त किए।

जब देश भर में हंगामा हुआ और केंद्र सरकार ने इस घोटाले की जांच शुरू की, तो मज़ाक देखिए—उसी NTA के अध्यक्ष प्रदीप जोशी को जांच समिति में शामिल कर लिया गया! यह सीधे तौर पर “चोर से ही चोरी की जांच कराने” के समान है। ऐसी जांच से छात्रों को क्या न्याय मिलेगा?

4. परीक्षा प्रणाली का पूरी तरह से कॉर्पोरेट और निजीकरण

हमारे नेता राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी लगातार यह आवाज उठा रहे हैं कि भाजपा सरकार ने सरकारी परीक्षाओं की पूरी पवित्रता को नष्ट कर दिया है। पेपर सेट करने, उसकी प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन से लेकर एग्जाम सेंटर के मैनेजमेंट तक का पूरी तरह से निजीकरण कर दिया गया है।

यह सारा ठेका आउटसोर्सिंग के माध्यम से आरएसएस (RSS) और भाजपा से जुड़े निजी ठेकेदारों की जेबें भरने के लिए दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो यह है कि CBSE के पेपर का ठेका तक एक ब्लैकलिस्टेड (Blacklisted) कंपनी को सौंप दिया गया था।

5. विज़न की तुलना: कांग्रेस बनाम भाजपा

नौजवान साथियों, आज हमें इतिहास के पन्नों को भी देखना होगा। कांग्रेस ने हमेशा देश के युवाओं को मजबूत बनाने का विज़न रखा—

– 1951 में कांग्रेस ने देश को पहला IIT दिया।
– 1956 में दिल्ली में देश का पहला AIIMS स्थापित किया।
– 1961 में कोलकाता में देश को पहला IIM दिया, ताकि उच्च शिक्षा का वैश्विक स्तर तैयार हो सके।

इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने पिछले 5 वर्षों में देश के युवाओं को क्या दिया? केवल CBSE और NEET जैसे बड़े-बड़े महा-घोटाले, जिन्होंने युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया और उनके सपनों को सरेआम नीलाम कर दिया।

हमारी मुख्य मांगें और संकल्प
इन तमाम घोटालों, धांधलियों और देश की शिक्षा व्यवस्था को वेंटिलेटर पर पहुँचाने के विरोध में हमारे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी, प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी और पूरी कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करती है।

हमारा सीधा और स्पष्ट आरोप है कि भाजपा ने “केजी (KG) से लेकर पीजी (PG) तक” पूरी शिक्षा व्यवस्था में सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार की फसल बोई है और हमारे देश के नौजवानों का मानसिक व आर्थिक शोषण किया है।

हम युवाओं के हक और न्याय की इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक जारी रखेंगे।

पूर्व मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह जी ने कहा कि
आज मध्य प्रदेश का युवा अपने भविष्य को लेकर सबसे अधिक चिंतित है। वर्तमान और पूर्व भाजपा सरकारों ने युवाओं के भविष्य और उनके स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ किया है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि जो अधिकारी जितना बड़ा भ्रष्टाचार करता है या पेपर लीक जैसे घोटालों में शामिल होता है, उसे उतना ही अधिक संरक्षण और प्रमोशन दिया जाता है। इससे युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास लगातार कमजोर हुआ है।

युवाओं के रोजगार, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और अवसरों की असमानता जैसे गंभीर मुद्दों को हमारे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी ने लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। इसी संकल्प के साथ मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने युवाओं की आवाज़ को मजबूती देने और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है।

इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए 14 जुलाई को इंदौर से “युवा स्वाभिमान जेन-जी साइक्लोथॉन” की शुरुआत होगी। यह यात्रा देवास और सीहोर होते हुए 15 जुलाई को भोपाल पहुँचेगी। इस साइक्लोथॉन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं की आवाज़ को बुलंद करना और उनके अधिकारों के लिए जनजागरण करना है।

हमारा संकल्प स्पष्ट है—मध्य प्रदेश के प्रत्येक नौजवान को “केजी से पीजी” (KG to PG) तक बिना किसी भ्रष्टाचार के समान, गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। शिक्षा और रोजगार हर युवा का अधिकार है, किसी सरकार की कृपा नहीं।

कांग्रेस पार्टी युवाओं के भविष्य, उनके सम्मान और उनके अधिकारों की इस लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी।

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