जीवन की दिशा बदली, प्रकृति बनी गुरु और आनंद बना जीवन का आधार

भोपाल में तीन दिवसीय आनंद सहयोगी प्रशिक्षण शिविर का भावपूर्ण समापन, प्रदेशभर से आए प्रतिभागियों में कटनी से पहुंचे हरिशंकर पाराशर राजा सूर्यवंशी मिला विशेष सम्मान

भोपाल (RPKP INDIA NEWS) जीवन की भागदौड़ में जब मनुष्य स्वयं से दूर होने लगता है, तब प्रकृति उसे ठहरना, मुस्कुराना और जीवन का वास्तविक अर्थ समझाती है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन के राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आनंद सहयोगी प्रशिक्षण शिविर का बुधवार को भोपाल में भावपूर्ण समापन हुआ। प्रशिक्षण ने प्रतिभागियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दृष्टि से जीने की नई प्रेरणा भी दी।

20 से 22 जुलाई तक आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए आनंद सहयोगियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तीन दिनों तक चले संवाद, अभ्यास, समूह गतिविधियों एवं अनुभव साझा करने के सत्रों ने प्रतिभागियों के भीतर आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और आनंदमय जीवन की नई चेतना का संचार किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों ने कहा कि जीवन को नदी की तरह निरंतर प्रवाहित रहना चाहिए। नदी अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं से घबराती नहीं, बल्कि नया रास्ता बनाकर आगे बढ़ती है। यही संदेश जीवन के हर संघर्ष में सकारात्मक सोच और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

शिविर में प्रकृति को जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक बताते हुए कहा गया कि प्रकृति हमें धैर्य, संतुलन, अनुशासन, सहनशीलता और निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। यदि मनुष्य प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन जीना सीख ले, तो तनाव और निराशा स्वतः दूर होने लगते हैं तथा जीवन आनंद से भर उठता है।

समापन समारोह में प्रशिक्षण में उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले आनंद सहयोगियों को विशेष प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके व्यक्तित्व और सामाजिक दायित्वों को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

इस अवसर पर फाउंडेशन के सदस्यों एवं वरिष्ठ प्रशिक्षकों ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आनंद केवल स्वयं खुश रहने का नाम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, प्रेम, सहयोग और संवेदनशीलता का वातावरण निर्मित करने का माध्यम भी है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने-अपने क्षेत्रों में आनंद की इस भावना को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

तीन दिनों तक साथ सीखने और रहने के बाद समापन का दृश्य बेहद भावुक रहा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए प्रतिभागी एक-दूसरे से गले मिलकर विदा हुए। स्नेह, अपनत्व और कृतज्ञता से भरे इन क्षणों ने प्रशिक्षण को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन भर याद रहने वाला आत्मीय अनुभव बना दिया।

✍️ हरि शंकर पाराशर
RPKP INDIA NEWS
          कटनी

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