धान उपार्जन के लिये 15 सितम्बर से होगा किसानों का पंजीयन
जिला उपार्जन समिति की बैठक सम्पन्न
कटनी – खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान एवं अन्य खरीफ फसलों के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर 2020 तक किया जायेगा। कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिला उपार्जन समिति की बैठक में किसानों के पंजीयन सहित खरीफ उपार्जन केन्द्रों की व्यवस्था, उपार्जन कार्य, परिवहन एवं भण्डारण की तैयारियों की समीक्षा की गई। इस मौके पर अपर कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत जगदीश चन्द्र गोमे, जिला आपूर्ति अधिकारी पी0के0 श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर, सहायक पंजीयक सहकारिता डॉ0 अरुण मसराम, जिला विपणन अधिकारी शिखा वर्मा, जिला प्रबंधक नान पियूष माली, सभी सहायक आपूर्ति अधिकारी, वेयर हाउसिंग, एफसीआई के अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री सिंह ने खरीफ मौसम में धान खरीदी के लिये किसानों का पंजीयन खरीदी केन्द्रों में बैनर, तौल कांटे, माईश्चर मीटर, छन्ना सहित आवश्यक सामग्री, बारदाना, किसानों की सुविधा के लिये पेयजल, छाया, सोशल डिस्टेन्सिंग के मानकों के पालन की तैयारियां अभी से सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होने बताया कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिये गेहूं खरीदी कार्य की तरह धान खरीदी में भी गाईडलाईन का पालन और हैण्डवॉशिंग, सैनीटाईजर, मास्क और सोशल डिस्टेन्स का पालन दृढ़ता से किया जायेगा। उन्होने कहा कि खरीदी के दौरान प्रत्येक खरीदी केन्द्र पर ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर और मास्क की उपलब्धता रखी जाये। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि अपात्र संस्थाओं के खरीदी केन्द्रों को आजीविका मिशन के स्वसहयता समूहों के माध्यम चलाने के प्रयास करें। उपार्जित धान के भण्डारण की व्यवस्था के लिये एफसीआई को भण्डारित 2.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं को रैक के माध्यम से परिवहन कर गोदाम रिक्त करने की कार्यवाही शीघ्र करने के निर्देश गये। कलेक्टर श्री सिंह ने मार्कफेड के जिला प्रबंधक से ओपन कैप में खराब हो रही धान के बारे में भी जानकारी ली। उन्होने कहा कि बरसात में ओपन कैप की धान खराब नहीं हो, इसके उचित प्रबंध करें। कलेक्टर ने जिला प्रबंधक नान को सहकारी समितियों का बकाया प्रासंगिक व्यय का भुगतान 15 सितम्बर तक अनिवार्य रुप से करने के निर्देश दिये।
जिला आपूर्ति अधिकारी प्रमोद श्रीवास्तव ने बताया कि खरीफ फसलों के उपार्जन हेतु किसानों का पंजीयन 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक होगा। पूर्व में पंजीकृत किसानों के मोबाईल या खाता क्रमांक में परिवर्तन होने की स्थिति में उन्हें अपडेट कराना होगा। पंजीयन के लिये किसान अपने मोबाईल एप, ऑनलाईन कियोस्क, पोर्टल या लोक सेवा केन्द्र और समितियों से पंजीकरण करा सकेंगे। केवल वनाधिकार पट्टाधारक या सिकमी कृषकों को अपना पंजीयन समिति से ही कराना होगा। जिले में कोव्डि संक्रमण काल के दृष्टिगत धान खरीदी केन्द्रों की संख्या 61 से बढ़ाकर 102 प्रस्तावित की गई है। गतवर्ष 36 हजार 30 पंजीकृत किसानों में से 33 हजार 916 किसानों ने अपनी धान 2 लाख 58 हजार एमटी विक्रय की थी। इस बार जिले में हुई धान की फसल और रकबे में वृद्धि के फलस्वरुप 3 लाख 25 हजार एमटी धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। अधीक्षक भू-अभिलेख मायाराम कोल ने बताया क फसल की गिरदावरी के अनुसार जिले में इस बार धान का रकबा एक लाख 94 हजार हैक्टेयर मापा गया है। जबकि गतवर्ष एक लाख 72 हजार हैक्टेयर में धान बोई गई थी। गतवर्ष धान की उत्पादकता 40 क्विंटल प्रति हैक्टेयर थी, जो इस बार 42 क्विंटल प्रति हैक्टेयर अनुमानित है। जिला प्रबंधक नान ने बताया कि धान खरीदी में 16 हजार 250 गठान वारदाने की जरुरत होगी। जिनमें 50 प्रतिशत नये और 50 प्रतिशत मिलर्स व पीडीएस दुकानों से प्राप्त पुराने वारदानें उपयोग किये जायेंगे। मिलर्स से 8 हजार गठानें वारदाने की मांग की गई है।
मेंड़ बंधान के कार्यों से बढ़ा धान का रकबा
जिला उपार्जन समिति की बैठक में बताया गया कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने लागू लॉकडाउन की अवधि में गांवों में लौटे प्रवासी मजदूरों की मेहनत और ग्रामीण विकास की मनरेगा योजना के तहत इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने खेतों में किये गये लगभग ढ़ाई हजार मेंड़ बंधान के कार्यो से जिले में धान की फसल का रकबा 22 हजार हैक्टेयर बढ़ा है। उप संचालक कृषि और अधीक्षक भू-अभिलेख ने बताया कि फसल गिरदावरी एप के अनुसार गतवर्ष जिले में धान का आच्छादित रकबा एक लाख 72 हजार हैक्टेयर था, जो इस वर्ष बढ़कर एक लाख 94 हजार हैक्टेयर हो गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश चन्द्र गोमे ने बताया कि अन्य राज्यों से लौटे मजदूरों को स्थानीय रोजगार की उपलब्धता के लिये ग्राम पंचायतों द्वारा ढ़ाई से तीन हजार मेंड़ बंधानों के कार्य कराये गये। प्रवासी मजदूरों ने अकृषि योग्य भूमि को भी सिंचाई के साधन, मेंड़ बंधान कर कृषि योग्य बनाया है।

