स्थानीय उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण की आवश्यकता अनुरुप कौशल विकास को दें प्राथमिकता – कलेक्टर
जिला कौशल विकास प्लान के प्रारुप पर चर्चा
कटनी – कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने कहा कि कटनी जिले में खनिज उद्योग सहित स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता के अनुरुप और वन डिस्ट्रिक्ट वन क्रॉप में शामिल फसलों एवं उद्यानिकी पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के पोटेन्शियल के अनुसार स्किल संसाधन तैयार करने संबंधी कार्य को जिला कौशल विकास प्लान में प्राथमिकता दें। शुक्रवार को जिला कौशल विकास समिति की बैठक में कलेक्टर श्री सिंह ने यह निर्देश दिये। इस मौके पर महाप्रबंधक उद्योग अजय श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर, जिला रोजगार अधिकारी डी0के0 पासी, एलडीएम उद्यम बानरा सहित शासकीय आईटीआई के प्राचार्य और जिला फेसिलिटेटर उपस्थित थे।
जिला कौशल विकास समिति की बैठक में जिला कौशल विकास के तैयार प्रारुप पर चर्चा कर विभागीय अधिकारियों से सुझाव लिये गये। अल्प अवधि कौशल विकास के तहत शासन की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं में प्रशिक्षण के लिये उपलब्ध सीट 3424 के विरुद्ध 1918 प्रशिक्षणार्थियों में से 872 व्यक्तियों को रोजगार से जोड़ने की जानकारी दी गई। इसी प्रकार दीर्घकालीन कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में शासकीय और अशासकीय 26 आईटीआई संस्थानों की उपलब्ध 4788 सीटों के विरुद्ध 1471 प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण उपरांत 145 के प्लेसमेन्ट की जानकारी दी गई।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जिले में खनिज उद्योगों की प्रचुरता और स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता के अनुरुप कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम से युवाओं को रोजगार के लिये तैयार कराये। वन डिस्ट्रिक्ट वन क्रॉप के तहत कटनी जिले में फसलों में धान और उद्यानिकी में टमाटर का चयन हुआ है। इन उत्पादनों से संबंधित खाद्य प्रसंस्करण के उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाये तथा आवश्यकता अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाये। इसके अलावा जिले में चावल, दाल मिल, आटा मिल उद्योगों के लिये भी प्रशिक्षित व्यक्तियों की जरुरत होती है। इसके अतिरिक्त वाहन चालकों की कमी के दृष्टिगत ड्राईविंग प्रशिक्षण भी आवश्यक है। महाप्रबंधक उद्योग अजय श्रीवास्तव ने बताया क औद्योगिक निवेश के तहत औद्योगिक क्षेत्र अमकुही में 56 इन्डस्ट्री आने का पूर्वानुमान है। इनके निवेशकों से आवश्यक स्किल की जानकारी लेकर मैनपॉवर तैयार किये जा सकते हैं। इसके अलावा आजीविका मिशन के स्वसहायता समूहों, खाद्य प्रसंस्करण यूनिट और स्थानीय छोटे-छोटे उद्यमों के पोटेन्शियल के अनुरुप स्किल्ड मैनपावर तैयार कर प्रशिक्षण कार्य योजना में शामिल किये जायें।

