उपनिर्वाचन के परिणाम घोषित होने तक शासकीय सेवक आयोग की प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे –

( दतिया )

आगामी विधानसभा उपनिर्वाचन 2020 को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से सम्पन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विहित आदर्श आचरण संहिता के तहत् शासकीय कर्मचारियों के लिए दिए गए निर्देश का उद्धरण प्रेषित है। शासकीय सेवकों का यह दायित्व है कि वह इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें एवं आचरण एवं व्यवहार में पूर्ण निष्पक्षता बरतें।

शासकीय सेवक निर्वाचन की सम्पूर्ण प्रक्रिया में निष्पक्ष रहे

शसकीय कर्मचारियों को निर्वाचन की सम्पूर्ण प्रक्रिया में बिल्कुल निष्पक्ष रहना चाहिए। यह आवश्यक है कि वह किसी को यह महसूस न होने दें कि वे निष्पक्ष नहीं है। जनता को उनकी निष्पक्षता का विश्वास होना चाहिए तथा उन्हें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे ऐसी शंका भी हो कि वह किसी दल या उम्मीदवार की मदद कर रहे है। संक्षेप में शासकीय कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के चुनाव प्रचार या अभियान में भाग नहीं लेना चाहिए तथा उन्हें यह देखना चाहिए कि उनकी सरकार में हैसियत या अधिकारी का लाभ कोई दल या उम्मीदवार न ले सके। निर्वाचन में किसी अभ्यर्थी के लिए कार्य करना मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 129 एवं 134 क की ओर विशेष रूप से आपका ध्यान आकर्षित किया जाता है, जिसके अनुसार निर्वाचनों अभिकर्ता, मतदान अभिकर्ता या गणना अभिकर्ता के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 28-क के अधीन नियमों के संचालन के लिए नियोजित समस्त अधिकारी, कर्मचारी तथा राज्य सरकार द्वारा पदाभिहित पुलिस अधिकारी निर्वाचन के परिणाम घोषित होने तक निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर समझे जायेंगे और उस समय तक निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के अधीन रहेंगे।
निर्वाचनों से सशक्त कर्तव्य को यथोचित तरीके से जिम्मेदारी पूर्वक करना विधि द्वारा अपेक्षित कर्तव्य है। जिसकी अवहेलना शासकीय सेवक को दण्ड़ का पात्र बनाती है। इस विषय में आपका ध्यान विशेष रूप से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 134 की और आकर्षित किया जाता है।

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