कैलाश विजयवर्गीय का पत्र भाजपा सरकार की विफलता और अंदरूनी कलह का सार्वजनिक प्रमाण : जीतू पटवारी

(भोपाल) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे गए पत्र को भाजपा सरकार की विफलता, प्रशासनिक अराजकता और बढ़ती अंदरूनी कलह का सार्वजनिक प्रमाण बताया है।

श्री पटवारी ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को स्वयं यह लिखना पड़ रहा है कि उन्हें पिछले दो वर्षों से केवल “असहयोग, उपेक्षा और विरोध” मिला है, तो यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। इससे स्पष्ट है कि सरकार के भीतर न समन्वय है और न ही मुख्यमंत्री का अपने मंत्रियों एवं प्रशासन पर प्रभाव दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि इंदौर जैसे प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक शहर की लगातार उपेक्षा की गई। मास्टर प्लान, मेट्रोपॉलिटन रीजन, एयरपोर्ट विस्तार, पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, आरजीपीवी और सिंहस्थ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर स्वयं मंत्री ने सवाल उठाए हैं। इससे भाजपा सरकार के विकास के दावों की वास्तविकता सामने आ गई है।

श्री पटवारी ने कहा कि इंदौर में जहरीले पानी से 35 लोगों की मौत हुई यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकार की संवेदनहीनता का उदाहरण है। ऐसे गंभीर मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक था।

उन्होंने कहा कैलाश विजयवर्गीय “आप अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश न करें। सरकार की हर विफलता का ठीकरा केवल मुख्यमंत्री के सिर पर नहीं फोड़ सकते। आप स्वयं इंदौर से जनप्रतिनिधि हैं, प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं। इंदौर की जनता के प्रति आपकी भी समान जिम्मेदारी है।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि यदि सरकार में आपकी बात नहीं सुनी जा रही थी, तो आप पिछले दो वर्षों तक मौन क्यों रहे? क्या आपने मंत्रिमंडल की बैठकों में इन मुद्दों को उठाया? यदि उठाया तो उसका क्या परिणाम निकला? और यदि नहीं उठाया, तो जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई?

उन्होंने कहा कि भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व को लेकर लगातार असंतोष सामने आ रहा है। समय-समय पर भाजपा के विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुके हैं। अब कैलाश विजयवर्गीय का पत्र भी यह साबित करता है कि भाजपा में अंदरूनी कलह लगातार बढ़ रही है और सरकार के भीतर विश्वास का संकट गहरा चुका है।

श्री पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूछा—
क्या आपके ही मंत्री द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं?
यदि सही हैं, तो दो वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि आरोप गलत हैं, तो क्या आप अपने मंत्री के बयान का खंडन करेंगे?
आखिर भाजपा सरकार में इंदौर की लगातार उपेक्षा क्यों हुई?

उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किए
यदि आपकी बात सरकार में नहीं सुनी जा रही थी, तो आप मंत्री पद पर बने क्यों रहे?
इंदौर की जनता को दो वर्षों तक इन समस्याओं की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं दी?
आज जब यह सार्वजनिक हुआ है, तब क्या आप अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे?

श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार विकास नहीं, बल्कि आपसी खींचतान और सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। इसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री पहले जनता को जवाब दें, उसके बाद राजनीतिक बयानबाजी करें।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी मांग करती है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैलाश विजयवर्गीय के पत्र में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे पर सार्वजनिक जवाब दें, इंदौर की उपेक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें तथा जहरीले पानी से हुई मौतों सहित सभी प्रशासनिक विफलताओं की जवाबदेही तय करें।

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