राम मंदिर के नाम पर ‘चंदा चोरी’ और भारी भ्रष्टाचार का आरोप: कांग्रेस ने की वर्तमान समिति को भंग करने और सेन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
(भोपाल) मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अत्यंत महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस पत्रकार वार्ता को प्रदेश के पूर्व धर्मस्व विभाग मंत्री पी.सी. शर्मा एवं ‘रामायण-2’ धारावाहिक में हनुमान जी का किरदार निभाने वाले कांग्रेस के प्रदेश सचिव विक्रम मस्ताल जी ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। कांग्रेस नेताओं ने प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के नाम पर देश-विदेश की जनता से लिए गए चंदे में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और चोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए केंद्र व राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
विक्रम मस्ताल (प्रदेश सचिव एवं अभिनेता) के मुख्य वक्तव्य:
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए श्री विक्रम मस्ताल ने अत्यंत आक्रामक लहजे में कहा कि आज भारत की आस्था और भारत की आत्मा प्रभु श्री राम के नाम पर ‘चंदा चोरी’ करने वालों को बेनकाब करने के लिए हम मीडिया के समक्ष उपस्थित हुए हैं। जो लोग हर मंच से यह दुहाई देते नहीं थकते थे कि “हम राम को लाए हैं”, मैं उस गूंगे राजा (सत्ताशीर्ष) से आह्वान करता हूं कि आज वे इस महाघोटाले पर मौन धारण करके क्यों बैठे हैं? जो नेता संसद में छाती ठोककर कहते थे कि हम सनातन के विशेषज्ञों की समिति बना रहे हैं, आज उन्हीं के संरक्षण में आरएसएस के लोग पैसे को लूट गए, लेकिन किसी के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। यह पूरे देश के लिए अत्यंत दुखद और शर्मनाक बात है।

विक्रम मस्ताल जी की प्रमुख मांगें:
1. वर्तमान समिति तत्काल भंग हो: राम मंदिर न्यास की वर्तमान समिति को अविलंब भंग किया जाए क्योंकि यह पूरी तरह से अपनी शुचिता खो चुकी है।
2. सेना (फौज) को सौंपी जाए जांच: देश में आज केवल हमारी फौज पर ही जनता का अटूट विश्वास शेष है। जिस प्रकार नीट (NEET) जैसे बड़े घोटालों में फौज की व्यवस्था और सुरक्षा का सहारा लिया गया, उसी प्रकार इस चंदा चोरी महाघोटाले की जांच भी फौज को दी जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
3. बड़े चेहरों पर हो सख्त कार्रवाई: जांच एजेंसियां केवल छोटे कर्मचारियों और काउंटिंग करने वाले गुर्गों को पकड़कर औपचारिकता पूरी कर रही हैं। क्या महज पैसे गिनने वाले लोग इतना बड़ा घोटाला कर सकते हैं? चंपत राय जैसे बड़े ओहदेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक सब मूकदर्शक बने बैठे हैं।
4. वर्ष 2019 से 2025 तक की भूमि खरीद की हो व्यापक जांच: साल 2019 से लेकर 2025 के बीच अयोध्या और उसके आसपास खरीदी गई सभी जमीनों की विस्तृत जांच होनी चाहिए। विशेषकर जिन भी व्यक्तियों या संस्थाओं के पास 1250 स्क्वायर फीट से अधिक की जगह है, उनकी गहन जांच हो कि वे किस संस्था, भाजपा या आरएसएस से जुड़े हैं।
श्री मस्ताल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह भारत की आत्मा पर कुठाराघात है। युगों-युगों तक जब भी राम मंदिर और प्रभु राम को याद किया जाएगा, तब राम को लूटने वाले इन अपराधियों और इस पर मौन रहने वाले उस ‘गूंगे राजा’ को भी इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
पूर्व धर्मस्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा के मुख्य वक्तव्य:
पत्रकार वार्ता को आगे बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम को ऐतिहासिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का ताला सबसे पहले वर्ष 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने खुलवाया था। तत्पश्चात, माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसकी घोषणा वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। लेकिन आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि देश की जनता द्वारा श्रद्धा से समर्पित किया गया पैसा और पवित्र ईंटें तक गायब कर दी गई हैं। इस सुनियोजित चोरी को अंजाम देने के लिए मंदिर परिसर में लगे कैमरों तक को हटा दिया गया था, जो कि एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।
पी.सी. शर्मा द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु एवं मांगें:
सोमनाथ मंदिर से तुलना: ऐतिहासिक रूप से सोमनाथ मंदिर को विदेशी आक्रांताओं द्वारा 17 बार लूटा गया था, लेकिन इन छद्म सनातनियों ने प्रभु राम के मंदिर को “70 बार लूटा” है।
चंपत राय पर सीधा हमला: श्री शर्मा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे जनता की आस्था का सारा पैसा और ईंटें लेकर ‘चंपत’ (गायब) हो गए हैं। कांग्रेस मांग करती है कि चंपत राय का महज इस्तीफा मंजूर करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पर तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।
दिखावे की जांच का आरोप: अब तक केवल पैसे गिनने वाले छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई की गाज गिरी है। दिखावे के लिए एसआईटी (SIT) तो गठित कर दी गई है, लेकिन मुख्य दोषियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
मार्शल लॉ और मिलिट्री जांच की मांग: इस संवेदनशील मामले में सामान्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष काम नहीं कर पाएंगी। इसलिए प्रधानमंत्री की चुप्पी की आलोचना करते हुए कांग्रेस मांग करती है कि पूरे क्षेत्र में मार्शल लॉ लगाकर राम मंदिर घोटाले की जांच मिलिट्री (सेना) के सुपुर्द की जाए। सेना ही पूरी निष्पक्षता से जांच करके इन बड़े दोषियों को बेनकाब कर उन्हें जेल और फांसी के फंदे तक पहुंचा सकती है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार से इन सभी बिंदुओं पर तत्काल कदम उठाने की मांग करती है, ताकि देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की आस्था के साथ हुआ यह क्रूर मजाक बंद हो सके और दोषियों को कठोरतम दंड मिले।
इस अवसर प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरोलिया, कुंदन पंजाबी, राहुल राज, झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान उपस्थित रहे।
