ब्रेकिंग न्यूज़ : सोशल ऑडिट से खुलेगी एसीसी सीएसआर विभाग की पोल
“एसीसी सीएसआर विभाग करता है काम कम, दिखावा ज्यादा”
गोद लिए गांव के लोगों ने लगाई गुहार- एसीसी सीएसआर विभाग बंद करें दिखावा
( कैमोर ) – एसीसी प्रबंधन का सीएसआर विभाग प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने में सफल हो गया है। हम बात कर रहे हैं कैमोर नगर में स्थित एसीसी कंपनी की, जो कि कैमोर नगर में स्थापित है। ज्ञात हो कोई भी कंपनी अपने क्षेत्र के विकास हेतु सीएसआर के माध्यम से काम करती है लेकिन कैमोर में बात कुछ और है। एसीसी कंपनी कैमोर नगर वासियों को न तो रोजगार देती है, न ही शिक्षा , स्वाथ्य की व्यवस्था करती है। प्रशासन को दिखाने के लिए उन्होंने कई गांवों को गोद लिया है लेकिन उन गांवों में से मात्र कुछ गांव का ही तो आरपीकेपी इंडिया न्यूज ने सर्वे कराया है जिसमें वहां के लोग इतना मजबूर हो गए हैं कि उन्होंने कहा कि जाए तो जाए कहां ? एसीसी कागजी कार्रवाई तो ऐसा करती है कि प्रशासन को संतुष्ट कर लेती है लेकिन प्रशासन को यह नहीं लगता है कि क्यों न उन गांवों का अपने द्वारा उस किए गए सीएसआर विभाग के काम की जाँच करवा ले। प्रशासन ऐसा क्यों नहीं करता यह तो आप सभी जानते हैं। प्रशासन भी जानता है कि एसीसी के मामले में क्यों बोले इसीलिए क्षेत्रवासियों का शोषण होता रहता है। आपको यह भी पता नही होगा कि एसीसी कंपनी ने तो प्रशासन को दिखाने के लिए एसीसी सीएसआर की गतिविधियां अपने स्वयं के एसीसी ट्रस्ट के नाम से चलाता है।
अब हम एसीसी ट्रस्ट से कुछ आम प्रश्न पूछना चाहते हैं।
1. एसीसी कंपनी ने जिन गांव को गोद लिया है अगर वहां सीएसआर विभाग काम कर रहा है तो जब आरपीकेपी इंडिया न्यूज़ ने सर्वे कराया तो उन्होंने क्यों नहीं कहा कि एसीसी कंपनी के माध्यम से उन्हें सुख सुविधा दी जाती है। उन्होंने यह क्यों कहा कि हम एसीसी सीएसआर विभाग से दुखी है।
2. एसीसी प्रबंधन अपने खुद के ट्रस्ट सीएसआर विभाग से गतिविधियां क्यों संचालित कराता है क्या वह स्थानीय किसी संस्था के माध्यम से सीएसआर की गतिविधियां संचालित क्यों नहीं कराता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एसीसी प्रबंधन यह जानता है कि हम प्रशासन को कागजी कार्रवाई में तो संतुष्ट कर ही देते हैं लेकिन अगर हम यहां के संस्था के माध्यम से गतिविधियां संचालित कराएंगे तो वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए अच्छे से अच्छा काम करेगा जिसमें से एसीसी सीएसआर विभाग के दिखावे जैसा काम नहीं करेगा। वह क्षेत्र के विकास के लिए अपनी जान वान शान लगा देगा ।
अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि हमेशा कि तरह एसीसी कंपनी ने अभी हाल ही में कहा है कि महिला जागरूकता अभियान में एसीसी ट्रस्ट अपना भरपूर सहयोग करता है लेकिन एसीसी कंपनी किस प्रकार से महिला जागरूकता अभियान में सपोर्ट कर रही है। महिला जागरूकता अभियान की बात हम इसलिये कर रहे हैं क्योंकि महिला जागरूकता अभियान जो संचालित किया जा रहा है वह एसीसी ट्रस्ट में आता है ना कि एसीसी प्रबंधन में इसलिए हम इस बात को आपको बता दें कि अगर एसीसी प्रबंधन अपने अमेहटा प्रोजेक्ट में किसी परिवार के बेरोजगार को नौकरी देता है तो उसका परिवार संतुष्ट होगा और उस परिवार की महिला को बाहर जाकर काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एसीसी सीएसआर दिखावा करना बंद करें क्योंकि वह प्रशासन को तो कागजी कार्रवाई में संतुष्ट कर सकती है लेकिन यहां का मीडिया उनकी यह मानसिकता को पूरी नहीं होने देगा। एसीसी कंपनी दिखावा करना बंद करें, यहां के क्षेत्रवासी दिखावे से परेशान हो चुके हैं। करना है तो कुछ काम करें ना कि दिखावा। एसीसी प्रबंधन जो भी गतिविधियां संचालित करता है वह मीडिया को क्यों नहीं बुलाता यह सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह बन चुका है क्योंकि वह जानते हैं कि यहां का मीडिया अगर उनकी गतिविधियां संचालन में शामिल होगा तो दिखावा छोड़कर क्षेत्रवासी को वही दिखाएगा जो कि उनके भले का है । क्योंकि एसीसी प्रबंधन वास्तविक रुप से काम नहीं करता इसलिए स्वयं फोटो खींचकर मीडिया को प्रेषित करता है और मीडिया को अपने होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने से बचता रहता है । प्रशासन से एसीसी सीएसआर विभाग के सोशल आडिट की मांग की जा रही है। अब देखना यह है कि जिले के आला अधिकारी एसीसी सीएसआर विभाग के सोशल ऑडिट की मांग पर कब ध्यान देते हैं या हमेशा की तरह चुप्पी साध लेते हैं।
रिपोर्ट : संतोष प्रसाद तिवारी चीफ एडिटर आरपीकेपी इंडिया न्यूज

