पन्ना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल – उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज
समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का नहीं मिल पा रहा उपचार, जनप्रतिनिधि कुंभकरण की निद्रा में
( पन्ना ) जिला अस्पताल पन्ना की फीवर क्लीनिक में कोविड-10 की जांच कराने के लिए लोगों की लंबी लंबी लाइन लगी हुई है। इसके बावजूद भी सभी लोगों की नहीं हो पा रही जांच सुविधायें। जिले में कोविड की जांच के लिए अराजकता का वातावरण पहले लोगों को एक जगह खड़ा कराया जाता है फिर लाइने लगवाई जाती हैं । इसके बाद 70 लोगों की जांच की जाती है। बाकी को वापस करा दिया जाता है। अगर यही हालात रहेंगे तो कैसे संक्रमण की चैन को तोड़ा जा सकता है। लोगों की जांच नहीं हो रही , लोग घर लौट रहे हैं । पीड़ित गरीब असहाय लोग लाइन लगाकर घंटों परेशान होते हैं । इसके बावजूद उन्हें घर वापस जाना पड़ता है जिससे अगर कोई भी व्यक्ति संदिग्ध है तो उसके पूरे परिवार व आसपास के लोगों को संक्रमण बढ़ रहा है। जांच का यह आलम है कि रिपोर्ट 4 से 5 दिन बाद आती है। जिला चिकित्सालय में तत्कालिक जांच रिपोर्ट की सुविधा ना होने के कारण कई मरीजों की जांच आने की पूर्व भी असमय मृत्यु हो जाती है। कई संदिग्धों की मौत हो रही है फिर भी जांच नहीं आ पाती। पन्ना जिले का भगवान ही मालिक है। पन्ना जिले के चुने हुए विधायक,मंत्री एवं शासन-प्रशासन के अधिकारी अपनी रोटी सेकने में लगे हुए हैं।
सागर में सिर्फ ढाई सौ मरीजों के सैंपल भेजने का ऊपर से फरमान
पन्ना जिले में संदिग्ध कोरोना मरीजों के सैंपल की जांच के लिए जो ऊपर से निर्देश पन्ना जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक सिर्फ ढाई सौ सैंपल सागर भेजने के लिए प्रतिदिन कहा गया है। इससे अधिक सैंपल जाने पर जांच नहीं हो पाती है जिसकी वजह से पन्ना जिले से सिर्फ 270 जांच सैंपल लेने के आदेश जिले के अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ हमले को दिए गए हैं। जबकि पन्ना जिला मुख्यालय में ही ढाई सौ से 300 मरीज जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं और जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हजारों की संख्या पहुंच रही है। ऐसे में जब पीड़ित संदिग्ध मरीजों के सैंपल ही नहीं लिए जाएंगे और यदि जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपल ले भी लिए गए और सागर में सभी जांचों का समय पर परीक्षण नहीं हो सकेगा तो निश्चित रूप से इस महामारी में लोगों को कैसे बचाया जा सकेगा यह विचारणीय है।

संदिग्ध मरीज जांच के लिए बेहद परेशान है
जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए जांचे बढ़ाई जानी चाहिए और लोगों को तत्काल दवा दी जानी चाहिए जिससे कि संक्रमण की चैन को तोड़ा जा सके। संदिग्ध लोगों को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सके।
समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का उपचार न मिलने से मौतों का आंकड़ा बढ़ा
जिला अस्पताल पन्ना में कहने के लिए तो 41 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं जिनमें से 35 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वही वर्तमान में सिर्फ चार विशेषज्ञ डॉक्टर कार्य कर रहे हैं। जिनमें से दो हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों में से डॉक्टर विद्यासागर उपाध्याय चौकी प्रभारी सिविल सर्जन है वह करोना पॉजिटिव हो चुके हैं। वही दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदीप द्विवेदी माता-पिता के उपचार के लिए अवकाश लेकर चले गए हैं। एकमात्र स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मीना नामदेव तथा हृदय रोग चिकित्सक डॉ एस के त्रिपाठी ही मरीजों को थोड़ा बहुत अस्पताल में पहुंचकर राहत पहुंचा रहे हैं। लेकिन कोविड वार्ड में कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने की वजह से पहुंचने वाले मरीजों को समय पर सही प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है जिसकी वजह से कई जवान युवाओं ने दम तोड़ दिया है। कई घटनाएं तो ऐसी जिला अस्पताल की आई है जिनमें पन्ना जिला अस्पताल में मरीजों को कोरोना पॉजिटिव बतलाया गया है और जब उन्हें उपचार हेतु सागर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है तब वहां पर उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। मगर वहां पर इंजेक्शन लगाते ही मरीज के जीवन ले लिए गए हैं और उनकी असमय मौत का कारण उपचार में लापरवाही के आरोप परिजनों द्वारा लगाए जा रहे हैं।
घर में रहे और छोटी-छोटी बीमारियों का मेडिकल से दवा लेकर ही करें उपचार : सी एम एच ओ डॉक्टर एलके तिवारी
पन्ना जिले के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एलके तिवारी ने बताया कि पन्ना जिले के जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी है वह कोरोना पॉजिटिव है एवं सिविल सर्जन कोरोना पॉजिटिव है । साथ ही अन्य चिकित्सक भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना संक्रमित मरीज बड़ी तादात में पहुंच रहे हैं। जिससे छोटी-छोटी बीमारियों को लेकर के अपने मरीजों को लेकर ना पहुंचे और प्राथमिक स्तर पर मेडिकल स्टोर एवं निजी चिकित्सकों से दवा लेकर के उपचार करें । जब अत्यंत गंभीर हालत मरीज की बने तभी उन्हें जिला अस्पताल या नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। इससे आपकी सुरक्षा और आपके परिवार की सुरक्षा हो सकेगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ तिवारी ने बताया कि बड़ी तादाद में डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके साथ ही सपोर्ट कर्मचारियों के भी रिक्त पद बड़ी मात्रा में है लेकिन इसके बावजूद पन्ना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को आसपास के जिले से बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मरीजों को अधिक से अधिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बढ़िया यही उपाय है कि बिना किसी अत्यंत जरूरी कार्य के घर के बाहर ना निकले, घर पर रहे, सकारात्मक सोचें और लोगों को मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलने की सलाह देवें। अपनी सुरक्षा में ही परिवार की सुरक्षा है।
रिपोर्ट: राम बिहारी गोस्वामी

