सेंड स्टोन को दिलाई पहचान, स्टोन से ही बनी खुद की पहचान

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नगर के राजू खरे ने छोटे स्तर पर शुरू किया था पत्थर का कारोबारआज देश-विदेश में करते हैं सप्लाई

(कटनी)  एक जिला एक उत्पाद के तहत कटनी जिले के लिये सेंड स्टोन और मार्बल को शामिल किया गया है। जिले में उपलब्ध मार्बल और सेंड स्टोन को सम्पूर्ण देश में अलग पहचान दिलाने शासन-प्रशासन स्तर पर कार्य किया जा रहा है। कटनी जिले में पाये जाने वाले सेंड स्टोन की डिमाण्ड जिले के साथ ही प्रदेश और देश में है। इसका उपयोग विभिन्न कलाकृतियों के निर्माण के साथ ही आकर्षक निर्माण के लिये काफी पसंद किया जाता है। सेंड स्टोन और मार्बल की कलाकृतियों के निर्माण को प्रोत्साहित करनके उद्देश्य से ही जिले में आगामी 9 नवम्बर से 28 नवम्बर तक ‘‘आधारशिला’’ स्टोन आर्ट फेस्टिवल का आयोजन भी जिला पुरातत्व एवं पर्यटन विकास समिति द्वारा किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश व देश के नामचीन शिल्पकार अपनी सहभागिता कर रहे हैं। रेत का कारोबार बंद करने के बाद नगर के राजू खरे ने छोटे स्तर पर जिले के सेंड स्टोन का कारोबार शुरू किया था। राजस्थान में एक कारोबारी के यहां कुछ कारीगरों से संपर्क हुआ और उसके बाद उनका कारोबार शुुरू हुआ तो आज पूरे हिन्दुस्तान के साथ विदेशों तक राजू पत्थर की सामग्री सप्लाई कर रहे हैं। राजू ने जहां जिले के सेंड स्टोन को पहचान दिलाई तो आज उनकी पहचान भी जिले का सेंड स्टोन ही है। देश के बड़े-बड़े शहरों के चौराहों से लेकर रिलाइंस के मुंबई आफिस तक और विदेशों तक वे स्टोन टाइल्स, स्टैच्यू, आर्च, जालियां, पिलर आदि सप्लाई कर रहे हैं।

            राजू खरे वर्ष 2005 से पहले तक रेत का कारोबार करते थे। रेत के कारोबार से मन हटा तो उन्होंने बड़वारा में एक छोटी सी मशीन लेकर पत्थर का कारोबार शुरू किया। लगभग 5 लाख रूपये की लागत से शुरू किए गए काम में शुरूआती दौर में कुछ खास फायदा नहीं हुआ। इस बीच उन्होंने नागपुर, कोटा, जयपुर, उदयपुर में कारोबारियों से संपर्क साधा लेकिन सफलता नहीं मिली। छह माह बाद चंडीगढ़ के सेक्टर 45 में बन रही ज्यूडिशियल एकेडमी में दिल्ली के सप्लायर के माध्यम से लगभग 80 हजार फीट पत्थर सप्लाई करने का आर्डर मिला। उसके बाद नागपुर में टुली ग्रुप को कुछ पत्थर सप्लाई किया।

पत्थर के कलर के विवाद से मिली दिशा

            व्यवसायी राजू खरे ने बताया कि उन्होंने उसी दौरान जयपुर में पत्थर के कुछ ब्लाक सप्लाई किए थे। जिसमें संबंधित व्यक्ति से कलर को लेकर कुछ विवाद हुआ। खरे उनसे मिलने जयपुर पहुंचे तो पाया कि जिले के पत्थर से जयपुर के कारीगर जालियां, पिलर, स्टैच्यू आदि तैयार कर रहे हैं। उन्हें कारीगरों से मिलने नहीं दिया गया लेकिन धीरे से वे अपना कार्ड कारीगरों को दे आए। जिसमें से कुछ कारीगरों ने उनसे संपर्क किया और वे कटनी मिलने आए। जयपुर से आए कारीगरों के माध्यम से खरे ने काम प्रारंभ किया तो पूर्व मंत्री स्वर्गीय सतेन्द्र पाठक ने संपर्क किया और बांधवगढ़ में बन रहे रिसोर्ट का कुछ काम कराया। उसके बाद विधायक संजय पाठक के माध्यम से ही उनकी मुलाकात तत्कालीन कलेक्टर एम. सेल्वेन्द्रन से हुई। कलेक्टर श्री सेल्वेन्द्रन ने उन्हें कलेक्ट्रेट के नवीन भवन के सामने पहाड़ी पर जिले के सेंड स्टोन से ही गार्डन बनाने का काम दिया और उसके बाद से काम निकल पड़ा।

गार्डन की खूबसूरती देख मिलने शुरू हुए काम

            व्यवसायी राजू खरे ने बताया कि कटनी कलेक्ट्रेट के गार्डन में सेंड स्टोन से कराए गए काम की खूबसूरती देखकर उन्हें सरकारी काम मिलना प्रारंभ हो गए। उसके बाद सिंगरौली, अनूपपुर, नरसिंहपुर, भोपाल, डिंडोरी, रीवा सहित अन्य शहरों में चौराहों, सरकारी कार्यालयों व घाटों आदि में स्टोन से बनी सामग्री लगाने का काम मिला तो दुबई, यूके, कतर सहित यूरोप के कई शहरों में भी उन्होंने कटनी के सेंड स्टोन से बने टाइल्स, कोबल्स सहित स्टैच्यू, जालियां, पिलर, आर्च, लैंप व अन्य सामग्री सप्लाई की। वर्तमान में उनके द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की पूरे हिन्दुस्तान के साथ देश-विदेश तक धूम है।

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