देशभर से उज्जैन पहुंचे हजारों श्रद्धालु , भगवान महाकालेश्वर की सवारी में डीजे पर रहेगा प्रतिबंध

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(उज्जैन) मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में परंपरागत रूप से श्रावण मास में निकलने वाली भगवान महाकालेश्वर की सवारी में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा। कलेक्टर आशीष सिंह ने गुरुवार को महाकालेश्वर सवारी की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों एवं समिति सदस्यों के प्रतिनिधियों की बैठक लेकर अब तक किये गये कार्यों की समीक्षा की।

सिंह ने कहा है कि महाकाल सवारी में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालुओं को केले, नारियल व अन्य खाद्य सामग्री का वितरण नहीं करें। बैठक में बताया गया कि महाकालेश्वर मन्दिर पहुंचने के लिये शहर में व्यवस्थित संकेतक (साइनेज) लगा दिए गए हैं। शीघ्र दर्शन की लाइन के लिए अलग से व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

सवारी वाले दिन बंद रहेगी प्रोटोकाल व्यवस्था

बैठक में फैसला लिया गया कि सभा मण्डप में पूजन के समय संख्या सीमित की जाए, साथ ही पालकी द्वार के आगे भी संख्या को सीमित रखा जाए। यहां पर नागपंचमी के लिए बनाये जा रहे अस्थाई पुल के पिलर भी खड़े किए जा रहे हैं। प्रोटोकाल व्यवस्था प्रत्येक सवारी वाले दिन दोपहर 2.30 बजे से 4.30 बजे तक एवं शाम 6 से 7.30 बजे तक बन्द रहेगी। रामघाट पर होने वाले पालकी पूजन के लिए झालरिया मठ से नाव में सवार होकर पुजारी रामघाट पहुंचेंगे

सावन के पहले दिन उज्जैन पहुंचे हजारों श्रद्धालु

वहीं श्रावण महीने के पहले दिन गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर विधिवत पूजा अर्चना की। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सूत्रों ने बताया कि प्रतिवर्ष श्रावण-भादौ मास में देश के 12 ज्योतर्लिगों में प्रमुख एवं प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की अपार भीड़ रहती है। देश के विभिन्न प्रांतों से यहां पहुंचे हजारों दर्शनार्थियों ने श्रावण के पहले दिन भगवान के दर्शन किए। इसके कारण भगवान महाकालेश्वर की नगरी शिवमय हो गई। भगवान का श्रावण मास के पहले दिन भांग से आकर्षक श्रृंगार किया गया।

बाबा महाकाल का हुआ अद्भुत श्रृंगार

इससे पहले तड़के भस्म आरती के दौरान भांग और चंदन से शृंगारित कर सौम्य आकृति बनाई गई। भगवान महाकालेश्वर का राजा के स्वरूप में अद्भुत श्रृंगार किया गया। पुजारियों ने हल्दी-चंदन आदि लगाकर शृंगारित किया। भस्मी रमाने वाले बाबा महाकाल को पहले जल-दूध से स्नान कराया गया, इसके बाद दही, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत अभिषेक पूजन कर भस्मी रमाई गई।

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