विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने सदैव लिखी है विकास की नई इबारत, महंगी न पड़ जाए उपेक्षा
जौहरियों की नजरों में ही दिखी खोट, कटनी जिले की जनता के साथ छलावा दुर्भाग्यपूर्ण
(कटनी) जिले की चारों विधानसभा सीट भाजपा की झोली में डालने वाली जनता जनार्दन को शीर्ष नेतृत्व की हठधर्मिता ने निराशा का दुर्भाग्यपूर्ण उपहार दिया है। महाकौशल क्षेत्र के कटनी जिले में हर किसी की निगाहें विजयराघवगढ़ में टिकी थीं और आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास था कि विजयराघवगढ़ को समूचे भारत में पहचान दिलाने वाले कद्दावर जनसेवक संजय सत्येंद्र पाठक को मंत्रिमंडल में स्थान मिलेगा और जिला गौरवान्वित होगा लेकिन इस बार भी कटनी जिला छलिया राजनीति का शिकार हो कर रह गया और जिले वासी किंकर्तव्यविमूढ़ रह गई। आखिर भाजपा के कर्णधार कहे जाने वाले इन जौहरियों को हीरे की परख क्यों नहीं हुई यह समझ से परे है।
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कहीं मध्यप्रदेश में भाजपा की अप्रत्याशित जीत ने भाजपा के वरिष्ठ शिपहशालारों की आंखों में दंभ का चश्मा तो नहीं पहना दिया है। चुनाव से पूर्व मंचों के माध्यम से इसी कटनी जिले की धरती पर बड़े बड़े वायदों के दिवास्वप्न दिखलाने वाले भाजपा के कर्णधार आखिर कटनी जिले को उपेक्षा का दंश देने में परहेज क्यों नहीं कर रहे? अगर देखा जाए तो शासन की योजनाओं को सबसे अधिक मूर्त रूप देने में विजयराघवगढ़ विधानसभा अग्रणी रहा है। धार्मिक, सामाजिक हर क्षेत्र में सेवा और समर्पण के साथ तत्पर रहने वाले विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने सदैव विकास की नई इबारत लिखी है।

यही वजह है की अपने आपको राजनीति के अखाड़े के दिग्गज मानने वाले विपक्षियों की फौज ने पूरे दांव पेंच आजमाने के बाद भी इस अभेद्य किले में सेंध लगाने में सफलता आज तक हासिल नहीं की और संजय पाठक अपराजेय ही रहे। विडंबना इस बात की है की पार्टी के लिए, पार्टी के सम्मान के लिए तन, मन और धन से समर्पित भाव रखने वाले जनसेवक को उनके समर्पण का पुरुस्कार नहीं मिला। जिस तरह से भाजपा द्वारा कटनी जिले की जनता के साथ छलावा किया गया है कहीं आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा भी न भुगतना पड़ जाए। जनता की आशाओं पर पानी फिरा है और हर कोई निराश हताश है। यह कहना गलत नहीं होगा की कटनी जिले की जनता में अब भाजपा के जौहरियों की नजरों में ही खोट नजर आने लगा है।
अजय त्रिपाठी, RPKP INDIA NEWS , विजयराघवगढ़

